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डिप्लोमा इन प्राइमरी केअर साईकेट्री प्रोग्राम का समापन,17 चिकित्सको को डिप्लोमा दिया एम्स ने

डिप्लोमा इन प्राइमरी केअर साईकेट्री प्रोग्राम का समापन,17 चिकित्सको को डिप्लोमा दिया एम्स ने

देहरादून/ऋषिकेश

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में डिप्लोमा इन प्राइमरी केयर साइकेट्री कोर्स करने वाले राज्य सरकार के 17 चिकित्सकों को डिप्लोमा प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के तहत राज्यभर के राजकीय चिकित्सकों को यह प्रशिक्षण एम्स ऋषिकेश, निम्हांस बैगलौर व एनएचएम उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में दिया गया है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में मनो चिकित्सकों का अभाव बना हुआ है,जिससे मनोरोग से ग्रसित मरीजों को लंबी यात्रा करके देहरादून, हल्द्वानी आदि शहरों में उपचार कराना पड़ता है। इसके मद्देनजर राज्य में निम्हांस बैंगलौर की ओर से नेशनल हेल्थ मिशन उत्तराखंड के साथ वर्ष 2017 से डिप्लोमा इन प्राइमरी केयर साइकेट्री का एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किया गया था। एम्स ऋषिकेश ने इस में चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने के लिए वर्ष 2018 से निम्हांस के साथ मिलकर अपनी सेवाएं देनी शुरू की। इस कोर्स के दौरान चिकित्सकों को टेली मेडिसिन के माध्यम से उनको घर बैठे ही प्रशिक्षण दिया गया। कोर्स के दो वर्ष पूर्ण होने पर उत्तीर्ण हुए दो बैच के 17 चिकित्सकों को डिप्लोमा प्रमाणपत्र बांटे गए। इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि संस्थान में कई विषयों पर डिप्लोमा कोर्स शुरू किए गए हैं, जिनके तहत वि​भिन्न विषयों में केवल उत्तराखंड में सेवारत चिकित्सकों को ट्रेनिंग देकर दक्ष बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा नामांकित होने पर ऐसे चिकित्सकों को संस्थान विभिन्न विषयों में प्रशिक्षित करेगा। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि इससे उत्तराखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर होगी और पहाड़वासियों को सूदूर पर्वतीय इलाकों में ही उपचार उपलब्ध हो सकेगा। डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता ने कहा कि दो बड़े संस्थानों के उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में किसी कार्य के लिए एकसाथ मिलकर प्रयास करना राज्य के खासकर दुर्गम इलाकों के लिए अभूतपूर्व पहल है। उन्होंने निम्हांस के निदेशक का आभार जताया कि उन्होंने मनो रोग जैसे विषय में चिकित्सकों को दक्ष बनाने के लिए एम्स संस्थान के मनो चिकित्सा विभाग को अपने साथ लिया। डीन प्रो. गुप्ता ने बताया कि एम्स संस्थान अगले वर्ष से डिप्लोमा इन प्राइमरी केयर साइकेट्री प्रोग्राम शुरू करेगा। इस अवसर पर दोनों संस्थानों के संयुक्त तत्वावधान में जारी नर्सिंग, काउंसलर व सीएचओ प्रशिक्षण कार्यक्रम के ट्रेनिंग मैनुअल व जनजागरुकता प्रचार सामग्री का मौजूद गणमान्य लोगों द्वारा लोकार्पण किया गया। निदेशक निम्हांस डा. बीएन गंगाधर ने टीम के सदस्यों व प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि निम्हांस व एम्स ऋ​षिकेश जनहित में हमेशा इस तरह के प्रयास करते रहेंगे, उन्होंने इस दिशा में एम्स के प्रयासों की सराहना की। निम्हांस के प्रो. सुरेश बडावठ ने इस कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला एवं नेशनल हेल्थ मिशन तथा मनोचिकित्सा विभाग एम्स ऋषिकेश का धन्यबाद ज्ञापित किया। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थानों ने इस कार्यक्रम के तहत न केवल चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया अपितु मरीजों को टेली मेडिसिन के माध्यम से उनके निकटतम अस्पताल पर ही उपचार की सुविधा दी। राज्य की डीजी हेल्थ डा. अमिता उप्रेती व निदेशक एनएचएम डा. अंजलि नौटियाल ने एम्स व निम्हांस द्वारा चलाए जा रहे इस प्रोग्राम की सराहना की और प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। डा. उप्रेती व डा. नौटियाल ने कहा कि राज्य सरकार इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हमेशा एम्स व निम्हांस जैसे संस्थानों को हरसंभव सहयोग करेगी। मनो चिकित्सा विभागाध्यक्ष डा. रवि गुप्ता ने बताया ​कि एम्स ऋषिकेश ने एनएचएम उत्तराखंड को इस तरह के नियमित प्रशिक्षण के लिए तीन वर्ष के ट्रेनिंग प्रोग्राम का प्रस्ताव भेजा है, राज्य सरकार की सहमति मिलते ही संस्थान व निम्हांस संयुक्तरूप से उत्तराखंड में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर्स, काउंसलर्स एवं कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर्स सीएचओ और चिकित्सकों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करेंगे। इस अवसर पर प्रो. नवीन कुमार, डा. मंजूनाथ, डा. गीता नेगी, डा. जितेंद्र रोहेला, डा. विशाल धीमान, डा. अनिद्या दास,डा. राजेश कुमार, डा. प्रेरणा बब्बर आदि मौजूद थे।

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