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सदन का हरेक पल जनता को समर्पित,लेकिन व्यवधान उनके साथ अन्याय जैसा….राज्यपाल बेबी रानी मोर्य

सदन का हरेक पल जनता को समर्पित,लेकिन व्यवधान उनके साथ अन्याय जैसा….राज्यपाल बेबी रानी मोर्य

देहरादून
राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने एक होटल में आयोजित देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के 79 वें वार्षिक सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि पीठासीन अधिकारी की सबसे बड़ी चुनौती सदन को सुचारू और व्यवस्थित तरीके से चलाने की होती है। पीठासीन अधिकारी को तटस्थ और निष्पक्ष होकर निर्णय लेने होते हैं। उन्हें यह देखना होता है कि सदन के सदस्यों के विचारों को पूर्ण अभिव्यक्ति मिले, इसके साथ ही विपक्ष के विचारों का समाधान हो तथा सदन की गरिमा और पीठ की निष्पक्षता बनी रहे। यह निश्चित ही कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे में पीठासीन अधिकारियों को धैर्य और संयम का परिचय देना होता है।
राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि सदन का एक-एक पल जनता को समर्पित होता है। ऐसे में जब सदन का समय शोर-शराबे और व्यवधान में नष्ट होता है तो यह जनता के प्रति एक तरह का अन्याय ही होता है। सदन में सार्थक बहस और चर्चा होनी चाहिए। कार्यपालिका विधायिका के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे, यह लोकतंत्र के अस्तित्व के लिए जरूरी है। यह कार्य सदन के माध्यम से ही हो सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची, दल बदल कानून से संबंधित है। राज्यपाल ने कहा कि इसके अन्र्तगत निर्णय करते हुए पीठासीन अधिकारी की भूमिका एक न्यायाधीश की तरह होती है। उन्हें निष्पक्ष होकर, पक्ष-विपक्ष में भेद किए बगैर तथा बिना किसी पूर्वाग्रह के अपना निर्णय सुनाना होता है। सदन में चर्चा के दौरान सदस्यों को भाषा की मर्यादा बनाए रखना बेहद जरूरी है। प्रश्नकाल और शून्यकाल आम जन की आवाज को कार्यपालिका तक पहुंचाने का बहुत ही सशक्त माध्यम हैं, मुझे लगता है कि इनका भरपूर प्रयोग होना ही चाहिए।
राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने उपस्थित सभी राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों से आग्रह किया कि वे पुनः देवभूमि उत्तराखण्ड अवश्य आये तथा यहां के चारधाम व अन्य तीर्थ स्थलों व मनोरम पर्यटक स्थलों का भ्रमण अवश्य करें।
इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, सांसद अजय भट्ट, उत्तराखण्ड विधान सभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, लोकसभा व राज्यसभा के महासचिव, विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष, विधानपरिषदों के सभापति एवं उत्तराखण्ड के विधायक आदि उपस्थित थे।

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