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जी0बी0 पन्त राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान एवं उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगकी परिशद ने संयुक्त रूप से कराया हिमालयन नॉलेज नेटवर्क का आयोजन।

जी0बी0 पन्त राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान एवं उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगकी परिशद ने संयुक्त रूप से कराया हिमालयन नॉलेज नेटवर्क का आयोजन।

डा0 पी0पी ध्यानि, कुलपति, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय, टिहरी गढ़वाल ने सत्र की अध्यक्षता की एवं सह-अध्यक्षता डा राजेन्द्र डोभाल, महानिदेषक, यूकॉस्ट, डॉ आर0 एस0 रावल, जीबी0 पन्त हिमालयन पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा, डा आर0सी0 सुन्द्रियाल, जीबी0 पन्त हिमालयन पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा, ने की। डॉ0 पियूश जोषी सत्र के समन्वयक थे। 7 हिमालय राज्यों से आये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिशद जिसमें जम्मू-कष्मीर, हिमाचल प्रदेष, मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा, सिक्किम और उत्तराखण्ड ने कार्यषाला में भाग लिया और अपने परिशदों द्वारा करये गये मूल्यवान गतिविधियों के बारे में बताया। डॉ0 आर0सी0 रावल ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि एक केंद्रीय सूचना प्रबन्ध प्रणाली होनी चाहिए। जिसमें सारी जानकारियां उपलब्ध हो। जी0बी0 पन्त संस्थान ने हिमालयन नॉलेज नेटवर्क की एक पहल की है जो बड़े पैमाने पर लाभ के लिए सभी संस्थानों, विष्वविद्यालयों, परिशदों और एजेंसियों को जोडेगी।
डॉ0 आर0सी0 सुन्द्रियाल ने कहा की भारतीय हिमालय क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और नीतियों को जोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बढ़े हिस्से का सतत का विकास काफी हद तक हिमालयी क्षेत्र में संचित संसाधनों पर निर्भर है। भारतीय हिमालय क्षेत्र में 11 राज्य आते हैं जिनमें 9 पूरी तरह और 2 आंषिक रूप से है। साथ ही 100 प्रतिषत ग्रेलेषियर और अल्पाइन तंत्र पूरी तरह से हिमालय पहाड़ों पर निर्भर है।
डॉ0 ए0ए0 माओ, प्रो0 ए0एन पुरोहित, डॉ0 जीएस रावत, डा0 राकेष षाह, डा0 आर0एस0 रावल, डॉ0 बी0पी पुरोहित, डॉ डी0पी उनियाल, डा अषोक मिश्रा, डॉ0 एच0सी0 पोखरियाल, डॉ ब्रिज मोहन षर्मा और 7 हिमालय राज्य परिशदों से आये हुए लोग ने अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किये।
हिमालयन नॉलेज नेटवर्क का मुख्य निश्कर्श –
– षिक्षाविदों, विद्वानों एवं विद्या केन्द्र व क्षेत्रीय केन्द्रों का विकसित और मजबूत कराना।
– साक्ष्य आधारित नीतियों और प्रथाओं को मजबूत करने के लिए।
– भारतीय हिमालय क्षेत्र में अनुसंधान निश्कर्शों और उत्कर्श्ट कार्यप्रणिलयों को साझा करने के लिए।
– भारतीय हिमालय क्षेत्र के लिए सहयोगी अनुसंधान लाभ और हितधारकों के लिए लाभ आधारित लिंक बनाना।
– नीति आयोग हिमालय की विषेशता और हिमालय से सम्बंधित ज्ञान के तहत सतत विकास के लिए चुनौतियों की पहचान करेगा।
सत्र के दौरान राश्ट्रीय गणित दिवस भी मनाया गया। इस अवसर पर ’गणित षिक्षा में चुनौतियां विशय पर मंथन सत्र आयोजित कियागया। सत्र की अध्यक्षता गणित विभाग आई0आई0 टी कानपुर के प्रो0 धीरेंन्द्र बहुगुणा ने की। मुख्य वक्ता प्रो0 कल्याण चक्रवर्ती, गणित विभाग हरीष चन्द्र अनुसंधान संस्थान, प्रयागराज थे। प्रो0 दुर्गा तोशनीवाल, प्रो0 भगवती प्रसाद चमोला, प्रो0 आ0के सैनी, श्री एस के गुप्ता, श्री संजीव कुमार, श्री महेषानंद आदि उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, विज्ञान धाम में चल रही उत्तराखण्ड की 14वीं प्रादेशिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस 2020 के दूसरे दिन 16 विषयों सहित एक ’’अन्वेषक पुरस्कार’’ श्रेणी के लिए विभिन्न 17 तकनीकी सत्रों का एक साथ आयोजन किया गया।

उत्तराखण्ड की 14वीं प्रादेशिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस-2020 के दूसरे दिन 16 विषयों कृषि विज्ञानय जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्म जैविकीय वनस्पति विज्ञानय रसायन विज्ञानय पृथ्वी विज्ञान सह भू-विज्ञान, भू-भौतिकीय अभियान्त्रिकी विज्ञान एवं तकनीकीय पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकीय गृह विज्ञानय पदार्थ एवं सूक्ष्मकण विज्ञानय गणित, सांख्यकी, कम्प्यूटर साइंसय चिकित्सा विज्ञान एवं औषधीय विज्ञानय भौतिक विज्ञानय ग्रामीण प्रौद्योगिकीय विज्ञान एवं समाज/विज्ञान लोकव्यापीकरणय पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञानय जन्तु विज्ञान के 16 तकनीकी सत्रों का एक साथ अलग-अलग सभागारों में आयोजन किया गया, जिसमें कुल 500 युवा शोधार्थी व वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा अपनी मौखिक तथा पोस्टर प्रस्तुतियां द्वारा विशेषज्ञों के सम्मुख अपने शोध कार्य का विवरण प्रस्तुत किया गया। मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों को परखा गया तथा उनके द्वारा चयन संस्तुति के पश्चात दो श्रेणियों (1.) आयु 20 से 30 वर्ष तथा (2.) 40 वर्ष तक के युवा पुरूष व महिला वैज्ञानिकों को ’’युवा वैज्ञानिक पुरस्कार’’ से कल आयोजित होने वाले समापन समारोह में नवाजा जायेगा।
इस विज्ञान कांग्रेस के आयोजन में ’इनोवेटर ऑफ द ईयर-2020’ पुरस्कार दिया जायेगा। विशेषज्ञों द्वारा दी गयी तथा आयोजित कुल सत्रों के विशेषज्ञों की संस्तुतियों को कल समापन समारोह में यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ0 राजेन्द्र डोभाल प्रस्तुत करेंगे।

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