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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून  एवं  भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता के बीच MOU हुआ

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता के बीच MOU हुआ

देहरादून

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून (पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की एक स्वायत्त परिषद्) एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता के मध्य वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गए।

इस समझौता ज्ञापन पर भा.वा.अ.शि.प., देहरादून के महानिदेशक अरूण सिंह रावत एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता के निदेक डॉ ए. ए. माओ द्वारा हस्ताक्षर किये गए।

भा.वा.अ.शि.प., देहरादून, देश भर में स्थित अपने संस्थानों और केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर वानिकी अनुसंधान, विस्तार, शिक्षा का मार्गदर्शन, प्रचार और समन्वय कर रहा है। वर्तमान में भा.वा.अ.शि.प. विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, वन उत्पादकता, जैव विविधता और कौशल विकास के क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के समकालीन मुद्दां पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
समझौता ज्ञापन पर वानिकी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान एवं संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के कार्यान्वयन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्ेदश्यों के साथ हस्ताक्षर किए गए हैं

इस सहयोग के माध्यम से भा.वा.अ.शि.प., देहरादून एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञताओं को साझा करके एक दूसरे के पूरक होंगे। इससे तकनीकी अंतराल की पहचान करने, वन आधारित प्रौद्योगिकियों के विस्तार, हितधारकों को सूचना के प्रसार के लिए संसाधनों के आदान-प्रदान में मदद मिलेगी। यह आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने और वन आधारित समुदायों की आय बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों के उपयोग को अनुकूलित करने के लिए उद्योगों की सहायता करने में भी मदद करेगा।

दोनों संगठनों से संबंधित वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों और केंद्रों के बीच अंतर-संस्थागत लिंक सहयोग को और मजबूत करेंगे। समझौता ज्ञापन से दोनों संगठनों के लिए शिक्षा, अनुसंधान और विकास में सहयोग मिलने की उम्मीद है और अंततः इसका लक्ष्य बेहतर आर्थिक और पारिस्थितिक सुरक्षा को बढ़ावा देना होगा।
इस अवसर पर भा.वा.अ.शि.प. के सभी उपमहानिदेशक, भा.वा.अ.ि.प के संस्थानो के सभी निदेशक, निदेक (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग), सभी सहायक महानिदेशक और वैज्ञानिक एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता के क्षेत्रीय केंद्रो के प्रमुख एवं अन्य वैज्ञानिको ने भाग लिया।

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