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जल शक्ति अभियान को जागरूकता रैली

जल शक्ति अभियान को जागरूकता रैली

देहरादून
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय देहरादून के सेवाकेन्द्र मीटठी बेरी, द्रोण विहार, प्रेमनगर मे जल शक्ति अभियान जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आरती दीदी ने कहा कि पिछले साल नीति आयोग द्वारा जारी समग्र जल प्रबंधन सूचकांक के अनुसार इस समय देश में 60 करोड लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं । इसके अलावा स्वच्छ जल की उपलब्धता न होने के कारण हर साल तकरीबन 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है ।जल संकट की इस समस्या को देखते हुए सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना जल शक्ति अभियान की शुरुआत की है । जल संचय, बेहतर कल, थीम से लागू ही यह योजना 1 जुलाई 2019 से शुरू हो गई है।
जल संरक्षण के लिए बहुत सारी बातें बताई जा सकती हैं । लेकिन इस अभियान में सबसे आवश्यक है मनुष्य की सोच में परिवर्तन तथा जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी।
मनुष्य शाश्वत मानवी मूल्यों का भंडार है। इन वस्तुओं का उपभोग केवल अपने अकेले के लिए नहीं करता । मानव समुदाय अपने प्रत्येक इकाई को वह अवसर प्रदान करती है जिसमें वह स्नेह, सहानुभूति , सहयोग, करुणा व सर्व के कल्याण की कोमल भावनाओं को साकार रूप प्रदान कर सकें । यही उदातत भावनाएं मानव समाज में शांति, सद्भावना और वास्तविक समृद्धि लाती हैं । यही है वे शाश्वत मानवीय मूल्य जो काल और क्षेत्र के बदलने पर भी अपने मूल्यमान नहीं बदलते।
इस अवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आरती दीदी जी ने कहा कि इस बह्याय जगत को चलाने के लिये जैसे जल की आवश्यकता है। इसी प्रकार आन्तिरिक जगत को चलाने के लिये मन की शुद्धि की आवश्यकता है। प्रकृति पर सबसे ज्यादा प्रभाव हमारी सोच अर्थात् आन्तिरिक जगत से पड़ता है। जब तक हमारे पास सत्यता की शक्ति विराजमान थी तब तक हमारे जीवन मे सुख, शान्ति, सब कुछ विराजमान था। जहाँ सत्यता की शक्ति है वहा शुद्धि और शान्ति है। जब हमारी सोच दूषित होती है तो उसका सबसे ज्यादा प्रभाव बह्याय जगत पर पड़ता है। जब हमारा बह्याय और आन्तिरिक जगत शुद्ध हो जाएगा तब नई दूनिया आएगी। जब हम राजयोग का अभ्यास करेगें तब हमारा आन्तिरिक जगत शुद्ध हो जाएगा।
डा.जे. के.पाण्डेय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की जल मदर नेचर से आया है। जल को बचाना हमारी मौलिक जिम्मेदारी है। यह जीवन की तरह है। जीवन की सबसे बड़ी समस्या यह है की हम जानते सबकुछ है पर मानते कुछ नही। अतः पानी को बचाना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
सीताराम भटट ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की जल हमारे जीवन मे बहुत महत्वपूर्ण है।
भ्राता सार्थक भाई ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा की समय के साथ-साथ परिस्थितियाँ बदलती है और परिस्थितियाँ के साथ-साथ प्रकृति भी बदलती है। प्रकृति भी हमारी दुखदाई हो गई है इसके लिए हमे क्रान्ती लानी करनी होगी। अध्यात्मिकता को सिखना होगा। हमे अपनी सोच को बदलेगें। सोच का प्रभाव सीधे-सीधे प्रकृति पर पड़ता है। जल के जो गुण है वह हमे अपने अन्दर धारण करने होगे।
मन्च संचालन बी.के सुशील ने किया |

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