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राज्य आंदोलनकारी आज भी सरकार की उपेक्षा के शिकार

राज्य आंदोलनकारी आज भी सरकार की उपेक्षा के शिकार

देहरादुन
राज्य आन्दोलनकारी मंच के सदस्यों द्वारा शहीद स्मारक देहरादून मै आयोजित की गई। राज्य सरकार द्वारा 8 सूत्रीय मांग पत्र पर कोई कार्यवाही नही करने व गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित ना करने आदि को लेकर सभी राज्य आन्दोलनकारियों ने अपना आक्रोश व्यक्त किया।
शहीद स्मारक पर राजपुर विधायक जब शहीद स्मारक पर पहुँचे तो सभी आन्दोलनकारियों ने उन्हे घेरकर अपनी नाराजगी व्यक्त की आखिर सरकार इस तरह राज्य व राज्य आन्दोलनकारियों की उपेक्षा क्यूं ?
जगमोहन सिंह नेगी व सुशीला अमोली ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर राज्य आन्दोलनकारी मातृ शक्ति को बधाई देते हुए कहा कि राज्य की लड़ाई मेँ महत्वपूर्ण भूमिका मेँ रही है़। आज 25-वर्षो बाद भी मातृ शक्ति को न्याय नहीं मिला औऱ अब भी सरकार उस मातृ शक्ति के बलिदान का वादा पूरा नहीं किया।
प्रदेश महासचिव रामलाल खंडूड़ी व जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा की सरकार व शासन से ‘ लेकर केन्द्र सरकार तक को बार बार ज्ञापन प्रेषित किये परन्तु सरकार कान बंद औऱ आंख खोलकर सो रहे है़। अब विधानसभा सत्र के बाद जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिगत रूप मेँ घेरकर सवाल पूछकर ज्ञापन प्रेषित किये जाएंगे।
राज्य आन्दोलनकारियो ने एक सुर मेँ सामान्य ओ बी सी कर्मचारी संगठन के साथ ही बेरोजगारों के आन्दोलन को अपना समर्थन दिया।
आपकों विदित होगा कि गत शीतकालीन सत्र के दौरान *दिनांक 05-दिसम्बर को प्रातः 10-30 बजे शहीद स्मारक से विधान सभा कूच किया गया था
राज्य आन्दोलनकारी अपनी 08-सूत्रीय मागों को लेकर विधानसभा घिराव करने की बात कही गयी थी परन्तु सब्बि।मांगे जस की तस हैं।
जिनमें मुजफ्फरनगर काण्ड के दोषियों को सजा , राज्य आन्दोलनकारियों के 10% शिथिलता का एक्ट जारी करना व चिन्हिकरण के लम्बित मामलों के साथ ही एक समान पेंशन व सम्मान परिषद का गठन करना, स्थाई राजधानी गैरसैण बनना, समूह ग मेँ बाहरी पात्रों क़ी भर्तियों पर रोक के साथ ही फारेस्ट भर्ती रद्द कर अधिकारियों पर कार्यवाही की जाय , राज्य मेँ लोक आयुक्त गठन, राज्य के भू-कानून मेँ शीघ्र बदलाव किया जाय व भू-खरीद पर रोक लगाई जाय ,राज्य मेँ भविष्य का होने वाले परिसीमन क्षेत्रफल के आधार पर हो,छात्रों एवं आन्दोलनकारियों पर जनहित क़ी मांग पर लगे मुकदमे वापस हो।
आज बेठक मेँ मुख्यतः ओमी उनियाल , जगमोहन सिंह नेगी , सरिता नेगी , रामलाल खंडूड़ी , वेद प्रकाश शर्मा , प्रदीप कुकरेती , डी एस गुसाईं , युद्धवीर सिंह चौहान , हरिकृष्ण भट्ट , हरजिंदर सिंह , विक्रम भंडारी , सुरेन्द्र कुकरेती , केशव उनियाल , चंद्रकाता बेल्वाल , राधा तिवारी , अरुणा थपलियाल , सुलोचना भट्ट , भूमा रावत , सुशीला अमोली , सावित्री नेगी विनोद असवाल , जीतपाल बर्त्वाल , ललित जोशी , सुरेश कुमार , बीर सिंह रावत , सुरेश नेगी , प्रमोद पंत , मुन्ना सिंह रावत , प्रभात डड्रियाल , धनंजय घिल्डियाल , राकेश नौटियाल , राजेश पान्थरी , विजय बलोनीं , हेमंत मंझखोला आदि मौजूद रहे
वही दोपहर राज्य आन्दोलनकारी जेसे ही बेठक समाप्त कर शहीद स्मारक से बाहर कोर्ट कंपाउंड मेँ आये तो सभी ने कोर्ट मेँ स्थित S B I के बंद कार्यालय के अन्दर से हूटर की लगातार आवाज आ रही थी सभी चिंतित हुए ओर बेंक का सम्पर्क ढूढने लगे परन्तु कुछ नहीं मिला फिर प्रदीप कुकरेती ने पुलिस कंट्रोल रूम फोन किया परन्तु उनके पास भी बेंक का कोई सम्पर्क नहीं था तत्पश्चात फिर प्रदीप ने अपनें चचेरे भाई अधिवक्ता राजेश कुकरेती को फोन किया क्योंकि ये दोनों ही बचत खाताधारक है़। फिर अधिवक्ता राजेश कुकरेती ने शाखा प्रबंधक व कर्मचारी को फोन किया तो ठीक अगले पांच मिनट मेँ कार मेँ सवार होकर आकर उन्होने उसे बंद किया जो हल्की स्पार्किंग के कारण उत्पन हुआ था। SBI प्रबन्धक प्रीतम आर्य ने अंत में सभी का जागरूकता को लेकर धन्यवाद दिया।

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