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हेलेन केलर ओर अष्टावक्र के जीवन संघर्षो से हमको सीखना होगा …राज्यपाल बेबीरानी मोर्य

हेलेन केलर ओर अष्टावक्र के जीवन संघर्षो से हमको सीखना होगा …राज्यपाल बेबीरानी मोर्य

राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांग सशक्तीकरण संस्थान द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम का उद्घाटन किया। राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने राजपुर रोड स्थित एन.आई.वी.एच के प्रांगण में छोटे बच्चों को स्वर्ण प्राशन औषधि की बूंदे पिलाकर इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर हेलन केलर पार्क और अष्टावक्र सभागार सहित संस्थान के कैलेण्डर, पुस्तकों, ब्रेललिपि में बनाये गये नक्शों आदि का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य होते हैं। स्वर्ण प्राशन संस्कार का उद्देश्य बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद एक प्राचीन शास्त्र है और स्वर्ण प्राशन एक आयुर्वेद पद्वति है। उन्होंने कहा कि हेलन केलर और अष्टावक्र के जीवन संघर्षों से सीख लेनी चाहिये और प्रतिकूल परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करनी चाहिये। उन्होंने संस्थान को 51000 रू की सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि संस्थान को उत्तराखण्ड सरकार से जो भी सहायता चाहिये वो प्रदान की जायेगी। राज्यपाल ने एक दृष्टि दिव्यांग बच्चे द्वारा ऊन से बनाये गये फूलों के गुलदस्ते की भूरि-भूरि प्रशंसा की और संस्थान के निदेशक को इसका अधिक निर्माण करने का सुझाव दिया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने आयुर्वेद चिकित्सा शिविर तथा गौशाला एवं दिव्यांग हाट का उद्घाटन भी किया। राज्यपाल ने स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम में योगदान देने वाले आयुर्वेद चिकित्सकों को भी सम्मानित किया।
विद्यायक गणेश जोशी ने कहा कि संस्थान के लिए शीघ्र ही एक एंबुलेंस का प्रबंध, हंस फाउण्डेशन के माध्यम से किया जायेगा। उन्होंने स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम हेतु आयुर्वेद विश्वविद्यालय को बधाई दी।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 सुनील कुमार जोशी ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र के अन्तर्गत स्वर्ण प्राशन की दवा पुष्य नक्षत्र में अति लाभकारी सिद्ध होती है। आयुर्वेद की इस विधा से 16 वर्ष तक आयु के बच्चों में इस दवा से मानसिक विकास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती है। पुष्य नक्षत्र में इस दवा से बच्चों को विभिन्न बिमारियों से बचाया जा सकता है। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय का प्रयास होगा कि स्वर्ण प्राशन के कार्यक्रम को पूरे उत्तराखण्ड प्रदेश में लागू किया जाय जिससे हमारे प्रदेश के नौनिहाल स्वस्थ और निरोगी बन सकें।
कार्यक्रम का संचालन योगेश अग्रवाल एवं श्रीमती चेतना गोला द्वारा किया गया।
इस अवसर पर एन.आई.वी.एच. के निदेशक प्रो0 नचिकेता राऊत, संयुक्त सचिव डा0 प्रबोध सेठ, आयुर्वेद चिकित्सक, एन.आई.वी.एच के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित थे।

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