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शरत पूर्णिमा में आखिर क्यों आधी रात को खाई जाती है चांद की रोशनी में रखी खीर

शरत पूर्णिमा में आखिर क्यों आधी रात को खाई जाती है चांद की रोशनी में रखी खीर

देहरादून
किसी अमृत से कम नहीं है शरद पूर्णिमा पर बनने वाली खीर, दूर होती हैं बहुत सी बीमारियां
शरद पूर्णिमा की खीर

सभी पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का एक विशेष महत्व है।
शरद पूर्णिमा अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है. इसे कौमुदी पूर्णिमा भी कहा जाता है।परम्परानूसार शरद पूर्णिमा पर खीर बनाई जाती है और उसे पूरी रात खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। इससे यह अमृत के समान हो जाती है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि खुले आसमान के नीचे रखी जाने वाली इस खीर को खाने से सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद अपनी सभी 16 कलाओं से भरा होता है, जिस वजह से चांद रात 12 बजे धरती पर अमृत बरसाता है।इसी अमृत को प्रसाद के तौर पर ग्रहण करने के लिए खीर चांद की रोशनी में रखी जाती है रात 12 बजे के बाद खीर उठाकर प्रसाद के तौर पर खाई जाती है।
जानने की कोशिश करते हैं की आखिर खुले आसमान में रखे जाने वाली खीर को खाने के सेहत को क्‍या फायदे हैं।

शरद पूर्णिमा की खीर दिल के मरीज़ों और फेफड़े के मरीज़ों के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. इसे खाने से श्वांस संबंधी बीमारी भी दूर होती हैं।

दमा की बीमारी से परेशान लोगों के लिए यह खीर खाना काफी फायदेमंद होता है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने के बाद सुबह चार बजे के आसपास दमा रोगियों को खा लेनी चाह‍िये।

हालांकि साइंसदा बताते है कि दूध में लैक्टिक नामक अम्ल पाया जाता है, जो चंद्रमा की किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। इसके साथ ही चावल में स्टार्च पाया जाता है जिस वजह से ये प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार भी इस खीर का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है।

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