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अब राजधानी के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ऑक्सिजन देने के लिए मेट्रो नियो पर कसरत

अब राजधानी के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ऑक्सिजन देने के लिए मेट्रो नियो पर कसरत

देहरादून

 

दून के लोग शायद भूल भी गए होंगे कि कब बिना जाम में फंसे सड़क पर चले होंगे ,हालत ये है कि रेड लाइट पर भी ग्रीन लाइट की उम्मीद में कई बार दो बार होने के बाद भी नही निकल पाते।

हालांकि नेता हो या अधिकारी सभी कुछ न कुछ प्लान तो।करते ही रहे होंगे। जिसके चलते उत्तराखण्ड की राजधानी बनने के बाद भी देहरादुन के ट्रैफिक में दुनिया भर के एक्सपेरिमेंट करने के बावजूद कोई नही सुधार पाया।

जबकि प्रस्तावित पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम केबल कार से शुरू होकर मेट्रो, लाइट रेल ट्रांजिट और रोपवे से होते हुए अब ट्राम पर पहुंचा दिया गया है, और मेट्रो नियो नाम दिया गया है।

उत्तराखंड मेट्रो रेल कारपोरेशन ने मेट्रो नियो की डीपीआर तैयार कर है कॉरपोरेशन बोर्ड की बैठक में डीपीआर एपूर्वल के बाद कैबिनेट में अंतिम फैसला होगा। उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन बोर्ड की बैठक 6 अप्रैल में बुलाई गई है। बैठक में मेट्रो निया की डीपीआर पर फैसली लिया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे शासन के पास भेजा जाएगा जहां डीपीआर अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट में जाएगी। कैबिनेट की मोहर लगने के बाद इस पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

 

देहरादून में मेट्रो नियो के लिए बनाई गई डीपीआर को खुद उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने तैयार किया है। यह डीपीआर मेट्रो रेल के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन द्वारा बनाई गई डीपीआर को कन्वर्ट करके तैयार की गई है। दिल्ली मेट्रो रेलकॉरपोरेशन को 2016 में 43 लाख रुपये देकर यह डीपीआर तैयार करवाई गई थी।

 

हालांकि दून में ईजी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए बार-बार विकल्प बदले जाने के पीछे के कारण इस पर खर्च होने वाली धनराशि ही बताई जाती है।

सबसे पहले मुख्य मार्ग के बीचों- बीच एलिवेटेड ट्रेक बनाकर उन पर बिना ड्राइवर की कार चलाने की योजना बनी, जो मेन रोड पर जगह की कमी के कारण रद्द की गई। इसके बाद मेट्रो रेल की योजना बनी जिस पर करीब 45 हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे।फिर इसकी जगह लाइट रेल ट्रांजिट योजना भी बनी पर यह भी कैंसिल ही हुई।

हालांकि अगर रोपवे पर पूरा होमवर्क हुआ। इस योजना पर लंबा होमवर्क चला बाकायदा रूट भी निर्धारित कर दिये गये और इसमें भी करीब 22 हजार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान था ये भी कैंसल हो गयी और अब मेट्रो नियो पर काम चलने की बात हो रहा है।

जितेन्द्र त्यागी,डायरेक्टर, उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने जानकारी दी कि मेट्रो नियों के लिए बनी डीपीआर के मुताबिक शुरु में दो रूट, आईएसबीटी से गांधी पार्क और एफआरआई से रायपुर तक बनेगे 20 किमी लंबे इन दो रूटपर 10 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है,मेट्रो नियो की तैयार डीपीआर को होली के बाद बोर्ड की बैठक में डीपीआर पास करने के बाद मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाना है,उम्मीद है देर नहीं लगेगी।

वहीं अनूप नौटियाल, फाउंडेशन, एसडीसी फाउंडेशन, ट्रैफिक बढ़ने का कारण ईजी पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की कमी है। जबकि विकल्पों पर आजतक कागजों में ही काम हो रहा है,अब इसे धरातल पर उतारने के प्रयास होने ही चाहिए।

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