फूलदेई मना हर्षित हुए बच्चे

कुर्मांचल सांस्कृतिक एवं कल्याण परिषद, गढ़ी शाखा द्वारा फूलदेई का कार्यक्रम प्राचीन शिव एवं हनुमान मंदिर कौलागढ़ में मनाया गया। कार्यक्रम संयोजक बबीता साह लोहनी ने बताया कि आज चैत्र संक्रांति एक गते को यह फूलदेई का पर्व मनाया जाता है। फूलदेई का शाब्दिक अर्थ है फूलों से भरी हुई देहली अर्थात दहलीज। फूलों की तरह सबकी देहली सुख समृद्धि और खुशहाली से भरी रहे। प्रकृति में बिखरे हुए रंग बिरंगे फूलों के साथ सुख समृद्धि एवं खुशहाली के लिए छोटी छोटी बालिकाओं द्वारा देहली पूजन किया जाना इस पर्व का अनूठा हिस्सा है। चैत्र संक्रांति के दिन से ही भिटौली जो कि हर शादीशुदा लड़की के मायके से अपनी क्षमता अनुसार दी जाने वाली भेंट होती है इसकी शुरुआत भी होती है। फूलदेई कार्यक्रम में रंग बिरंगी परिधान मैं छोटी-छोटी बालिकाओं ने फूल और चावल से देहली पूजन किया और उसके साथ ही बच्चों ने, “फूल देई, छम्मा देई जतुका देला उतुका का सई “भी गाया । इसके बदले बच्चों को उपहार स्वरूप भेंट गुड़, चावल और पैसे दिए गए।कार्यक्रम में केंद्रीय अध्यक्ष कमल रजवार, केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रेमा तिवारी, केंद्रीय सांस्कृतिक सचिव बबीता साह लोहनी/ कार्यक्रम संयोजक, शाखा अध्यक्ष दामोदर कांडपाल, सचिव गिरीश चंद तिवारी, पवन डबराल पंडित श्री निवास नौटियाल जी, शैलेश डोभाल, हंसा राणा ,पुष्पा पंत एवम बच्चों में नेहा, तन्वी, काकुल ,आराध्या, शगुन ,समृद्धि ,नैना ,स्वास्तिका, पाखी सौम्या आदि उपस्थित थे।

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