राजधानी दून के पॉश एरिया राजपुर के वीरगीर वाली क्षेत्र में में फारेस्ट लैंड कब्जे मामले में बीजेपी नेता रविंद्र जुगरान ने बताया पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू से जान का खतरा,सिद्धू बोले सारा मामला निराधार

देहरादून

राजपुर थाना क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से खरीद फरोख्त करने और उस भूमि में बेशकीमती शाल के 25 पेड़ों को काटने व आरक्षित भूमि पर कब्जा करने के मामले में पूर्व डीजीपी बी एस सिद्धू समेत आठ लोगो पर मुकदमा दर्ज किया गया है, इस मामले में पूर्व डीजीपी का पहली बार बयान सामने आया है और यह बयान तब आया है जब आज इस पूरे मामले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता व वरिष्ठ नेता रविंद्र जुगरान ने व इस केस के अन्य पेटीशनर निर्विकार ने प्रेस क्लब देहरादून में प्रेस वार्ता कर पूरे मामले का खुलासा कर सरकार का आभार जताया और पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू से अपने साथ ही राजाजी नेशनल पार्क के ऑर्नरी वाइल्ड लाइफ वार्डन राजीव तलवार और पूर्व दरोगा निर्विकार की जान को खतरा भी बताया।

इस पूरे मामले में पूर्व DGP ने कहा है कि जिस मामले में उनके ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया है वो पिछले 10 सालो से कोर्ट में विचाराधीन हैं जबकि इस मामले में वो पहले ही शासन को पत्र लिखकर इसकी पूरी जानकारी शासन को दे चुके हैं, ऐसे में शासन को इस पुरे मामले में गुमराह किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है है कि उनके खिलाफ साजिश के तहत कार्यवाही की जा रही है।आप अगर बात करेंगे तो जांच में कई बाते सामने आ चुकी है जिस वक्त पेड़ काटे गए उस वक्त सभी वन अधिकारियों के फोन की लोकेशन मौके पर मिली है। मैं सारी जानकारी अब तक दे चुका हु। पूरा प्रकरण कोर्ट के सामने था अब सवाल ये है की पेड़ काटे वो मेने काटे या भूमाफिया के साथ मिलकर वन विभाग ने। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया एविडेंस में ये पाया है कि उस समय के डीएफओ धीरज पांडे और उनकी टीम ने भूमाफिया से मिलकर वो पेड़ काटे हैं। कोर्ट के पास उनके खिलाफ सारे एविडेंस हैं लेकिन 10 साल बाद भी वन विभाग मेरे खिलाफ एक भी एविडेंस नही दे पाया।

बताते चलें कि मसूरी प्रभागीय वन अधिकारी आशुतोष सिंह की तहरीर पर 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी बीएस सिद्धू और 7 अन्य के खिलाफ थाना राजपुर में मामला एफ आई आर दर्ज कराई गई है।

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