देहरादून/पटियाला
उत्तराखंड सभा पटियाला ने उत्तराखंड के सीएम धामी का ध्यान अपनी संस्था के माध्यम से प्रदेश की कई समस्याओं को लेकर उनका ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया और ये ज्ञापन शहीदों को नमन की टीम को भी प्रेषित किया आइए जानते हैं कि कौन सी ऐसी समस्याएं हैं जिनका निराकरण नहीं हो पाया है।
संस्था ने जो पत्र सीएम धामी को प्रेषित किया है आपकी नजर..
हमारी संस्था उतराखण्ड सभा पटियाला पंजाब आपका ध्यान कुछ जन समस्याओं की और दिलाना चाहती है जी।
जो कि हमारी सभा के ध्यान में सभा सदस्यों द्वारा समय-समय पर रखी गई है। जो क्रमशः निम्न अनुसार है।
👉1. जिला टिहरी गढ़वाल, के घनसाली से चमियाला तक मुख्य मोटर मार्ग बहुत ही संकरा है को चौड़ा किया जाये।
👉2. ताकि बाहरी राज्यों से आने-जाने वाले वाहनों, उतराखण्डी जनमानस व यात्रि जनों को बहुत दिक्कतों का सामना न करना पड़े ।
👉2.जिला टिहरी गढ़वाल के अंतर्गत चमियाला बाजार का मार्ग बहुत ही संकरा है। यहां बजार, बसों का अडा बहुत तंग जगह् पर है, यहाँ लोकल वाहनों की अधिक मात्रा होने के कारण लगभग प्रति दिन दिन लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है ।
विशेष कर जब पर्व/विवाह/समारोह के अवसरों पर घंटों-घंटों जाम लगने से जहाँ दूर-दराज जाने वाले यात्री, पर्यटक परेशान होते हैं वहीं स्थानीय लोगों को भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इसके लिए या तो बाईपास रोड बनायी जाये अथवा यहाँ की सड़क को राजधानी – देहरादून की तर्ज पर सड़क का चौड़ी करण किया जाये ताकि आने जाने वाले यात्रियों को को समुचित सुविधा मिल सके ।
👉3. (क) जिला- अल्मोड़ा, तहसील-द्वाराहाट, गाँव निरकोट,के तपड़मं से धूनी मंदिर तक सड़क मार्ग बनाया जाये।
(ख) घर घर नल लगवाने की स्कीम के तहत गाँव निरकोट में नल भी नही लगाये गये है।
👉3. संस्था के संज्ञान में आया है कि ,उतराखण्ड में विधवाओं को मिलने वाली अनुदान सहायता राशि मुख्य मंत्री राहत कोष से वितरण में वर्ष 2018 दौरान भेदभाव हुआ है । जिन भी महिलाओं को पिछले समय दौरान कम अनुदान राशि मिली है , को उचित सहायता अनुदान राशि की आज की महंगाई को मुख्य रखते अविलंब पूर्ति की जाय।
उदाहरण के तौर मुख्य मंत्री राहत कोष से प्रतेक विधवा महिला को प्रथमत: सहायतार्थ रूपये पचास हजार (₹50000/-) की सहायता राशि प्रदान किये जाने का प्रावधान उक्त समय पर था।
पर ,जिला टिहरी गढ़वाल , तहसील घनसाली की पटि- नैलचामी के ग्राम-मुयालगाॅव के स्वर्गीय मेघराज सिंह कुमांई की धर्मपत्नी पुष्पा देवी को मुख्य मंत्री राहत कोष से उक्त समय के विधायक के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा रूपये पांच हजार मात्र (₹5000/-) का चैक प्रदान किया गया है । जो कि उक्त महिला के साथ एक मजाक सा किया गया लगता है जो कि सही नहीं है।
अतः संस्था मांग करती है कि, उक्त महिला अथवा जो भी कोई अन्य विधवाएं किसी की भी मानवीय गलती अथवा कलैरीकल ग़लती के कारण सही सहायता राशि पराप्त करने से वंचित रह गयी हों ,के साथ न्याय करते हुए उचित बनती राशि दिलबाएं।
👉4.संस्था मांग करती है कि, विधवाओं को शैक्षिक योग्यता अनुसार जीवन निर्वाह हेतु सहायता के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान की जाये।
:ताकि उसे अपने परिवार के सदस्यों का जीवन निर्वाह में सरकार द्वारा सहयोग मिल सके।
👉5. गांव -सनणें पोस्ट आफिस जालली बलौक भिक्यासैण जिला अल्मोड़ा:-पेय जल समस्या का भी निदान करें।
यहां घरों में नल तो हैं पर पानी नहीं होता है। पानी सप्लाई से संबंधित जो टैंक जल स्त्रोतरों के नजदीक बनाये जाते हैं की उचित व्यवस्था नहीं की गई है जिस कारण समस्या बनी रहती है।
👉6. उतराखण्ड राज्य में पर्यटन को बढाने हेतु सभी मुख्य धार्मिक स्थलों को हिमाचल राज्य की तर्ज पर मोटर मार्ग से जोड़ा जाये।उनके आस पास धर्मशाला-भवनों , प्राथमिक चिकित्सालय का निर्माण जन हित मे करवाया जाये
👉7. संस्था मांग करती है कि, उतराखण्ड के सभी जिलों से पटियाला को बस सुविधायें हों। व पटियाला से उतराखण्ड के सभी जिलों हेतु बसें सुरू करवा ने हेतु जरूरी कदम उठाएं।
जिस से राज्य की आय भी बढेगी व स्थानीय जन को रोजगार के अवसर भी प्रदान होंगे ,वहीं तीर्थयात्रीयों को उचित सुविधायें मिल पायेंगी ।
👉7.उतराखण्ड में सभी जिलों में तहसील स्तर पर पोलो टैकनीक, डिग्री कालेज, बोर्डिंग स्कूलों की ब्यवस्था की जाये। जिला स्तर पर एम्स जैसे हास्पीटल बनाये जायें । बिजली निर्विघ्न वितरण ब्यवस्था हो। दुरूस्त नैट कनैकटविटी हो। जो कि आज विकास के आधार हैं।
उक्त सुविधाओं के मद्देनजर स्थानीय लोगों को पलायन करने से रोकने में मदद् होगी। क्यों कि देखा गया है कि उक्त सुविधाओं के आभाव में अधिकतर पलायन उतराखण्ड ग्रामीण इलाकों से मुख्यतः होता है। व बाहरी उतराखण्डी जनमानस को भी रोजगार के अवसर प्रदान हो सकेंगे ।
👉8. उतराखण्ड में कोई भी इस प्रकार का कानून/भूमि क़ानून न बनाया जाये जिस से प्रवासी उतराखण्डीयों का अहित होता हो, उसके अधिकार प्रभावित होते हों।
उतराखण्ड राज्य गठन आन्दोलन में प्रवासी उतराखण्डीयों की भी अहम् भागीदारी/भूमिका रही है। व आज भी वह उतराखण्ड के उज्जवल भविष्य हेतु ,वे प्रवास में सक्रिय है, प्रयासरत है। यही कारण है कि उतराखण्ड से दूर बैठ कर वह उतराखण्ड की भलाई के विषय में सोचता है।
जगह-जगह उतराखण्ड के नाम पर किसी न किसी रूप से अपनी संस्था-भवन बना कर अपनी संस्कृति से जुड़ा है उससे प्यार करता है।


