देहरादून
उत्तराखंड में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) लगाने की प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने यूजेवीएनएल की आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद पूर्व में तय नियमों में संशोधन करते हुए क्षमता आधारित टैरिफ मॉडल को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय को राज्य में अक्षय ऊर्जा के विस्तार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूजेवीएनएल ने आयोग के समक्ष यह तर्क रखा था कि बीईएसएस के लिए प्रति यूनिट आधारित टैरिफ व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि यह परियोजना पूरी तरह पूंजी-प्रधान होती है। डेवलपर्स को शुरुआत में ही भारी निवेश करना पड़ता है और मासिक ऋण भुगतान भी करना होता है, चाहे बैटरी से ऊर्जा का उपयोग हो या नहीं। ऐसी स्थिति में केवल प्रति यूनिट डिस्चार्ज पर भुगतान से राजस्व में अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे निवेशक हतोत्साहित होते हैं।
इसी आधार पर यूजेवीएनएल ने बीईएसएस के लिए क्षमता शुल्क (रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह) मॉडल लागू करने का अनुरोध किया था। आयोग ने इस प्रस्ताव पर विचार करते हुए देशभर में एनटीपीसी, एनएचपीसी और राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक जैसे राज्यों में जारी बीईएसएस टेंडरों का अध्ययन किया। अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश राज्यों में क्षमता शुल्क मॉडल ही अपनाया जा रहा है, जो वर्तमान समय में अधिक व्यवहारिक और स्थिर राजस्व देने वाला मॉडल है।
हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से तय ट्रेडिंग मार्जिन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सोलर परियोजनाओं के लिए चार प्रतिशत ट्रेडिंग मार्जिन और बीईएसएस के लिए पांच पैसे प्रति यूनिट ट्रेडिंग मार्जिन यथावत रहेगा। साथ ही आरई रेगुलेशन 2025 में निर्धारित 5.78 रुपये प्रति यूनिट की दर को अब क्षमता शुल्क के रूप में 3,96,747 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह के बराबर माना जाएगा। यह संशोधन आदेश की तिथि से लागू होकर आगामी आदेशों तक प्रभावी रहेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उत्तराखंड में बीईएसएस परियोजनाओं में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के जरिए दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को स्टोर कर पीक आवर में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति स्थिर होगी बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग का रास्ता भी खुलेगा। यह संशोधन राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित हो सकता है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के नियमों में संशोधन कर क्षमता आधारित टैरिफ को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से राज्य में बीईएसएस परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से तय ट्रेडिंग मार्जिन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। सोलर परियोजनाओं के लिए चार प्रतिशत ट्रेडिंग मार्जिन और बीईएसएस के लिए पांच पैसे प्रति यूनिट ट्रेडिंग मार्जिन यथावत रहेगा। साथ ही आरई रेगुलेशन 2025 में निर्धारित 5.78 रुपये प्रति यूनिट की दर को अब क्षमता शुल्क के रूप में 3,96,747 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह के बराबर माना जाएगा। यह संशोधन आदेश की तिथि से लागू होकर आगामी आदेशों तक प्रभावी रहेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उत्तराखंड में बीईएसएस परियोजनाओं में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के जरिए दिन में उत्पादित सौर ऊर्जा को स्टोर कर पीक आवर में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे न केवल बिजली आपूर्ति स्थिर होगी बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग का रास्ता भी खुलेगा। यह संशोधन राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित हो सकता है।