देहरादून
उत्तराखंड में एशियन वाटरबर्ड सेंसस (AWC) शनिवार को आसन (आसन, आसन वेटलैंड में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह नागरिक-विज्ञान अभियान इंटरनेशनल वाटरबर्ड सेंसस का हिस्सा है, जो 40वां AWC तथा 60वां IWC मना रहा है। इसमें पक्षी प्रेमियों, छात्रों, स्वयंसेवकों और वन कर्मियों ने सर्दियों में प्रवासी एवं स्थानीय जलीय पक्षियों की निगरानी की।
AWC 2026 उत्तराखंड (आसन) के प्रमुख निष्कर्ष…
– कुल पक्षी प्रजातियां दर्ज: 126 प्रजातियां।
– कुल पक्षी संख्या: 5806 पक्षी।
– संकटग्रस्त/दुर्लभ प्रजातियां: 1 Vulnerable (V), 2 Near Threatened (NT), 3 Endangered (EN)। कुल 6 संकटग्रस्त/NT श्रेणी की प्रजातियां। उल्लेखनीय: स्टेप ईगल (Endangered), कॉमन पोचार्ड (Vulnerable), फेरुगिनस डक (Near Threatened), इजिप्शियन वल्चर (Endangered), पैलास फिश ईगल (Endangered), एशियन वूली-नेक्ड स्टॉर्क (Near Threatened), रिवर लैपविंग (Near Threatened)।
– उल्लेखनीय रिकॉर्ड / हाइलाइट्स: रुडी शेलडक की सर्वाधिक संख्या (983); बार-हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज, कॉमन पोचार्ड, फेरुगिनस डक, एशियन वूली-नेक्ड स्टॉर्क, पैलास फिश ईगल आदि की मजबूत उपस्थिति; असन में प्रवासी जलपक्षियों की महत्वपूर्ण सभा।
– कुल प्रतिभागी: 27 जिनमे बर्डवाचर्स , गाइड और वन कर्मी।
– पिछले वर्षों से तुलनात्मक डेटा: 2024 में असन/राज्य स्तर पर 141 स्पीशीज, 5228 इंडिविजुअल्स; 2025 में 118 स्पीशीज, 5287 इंडिविजुअल्स। 2026 में असन पर स्थिर/सुधारित संख्या, राज्य में 2025 से अधिक साइट्स कवरेज के साथ।
सेंसस ने उत्तराखंड की आर्द्रभूमियों की स्थिति को उजागर किया तथा प्रदूषण, अतिक्रमण आदि खतरों की पहचान की। eBird तथा आर्द्रभूमि आकलन फॉर्म से डेटा केंद्रीय एशियाई फ्लाईवे पर संरक्षण रणनीतियों में योगदान देगा।
उत्तराखंड वन विभाग, उत्तराखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड, तथा eBird India द्वारा, एशियन वाटरबर्ड सेंसस, शैक्षणिक संस्थानों तथा भागीदार संगठनों (Titli Trust, Doon Nature Walks, Wildlife Preservation Society आदि) के सहयोग से आयोजित हुआ।
राज्य AWC समन्वयक संजय सोंधी, वन विभाग से प्रदीप सक्सेना, वरिष्ठ पक्षी पर्यवेक्षक श्रीमती आंचल सोंधी, अजय शर्मा, डॉ. वैभव महेश गुप्ता एवं
ईप्रोजेक्ट समन्वयक कुमारी रिया जैन उपस्थित रहे।