देहरादून/बागेश्वर
उत्तराखंड का एक और लाल दुश्मन से मुठभेड़ में शहीद हो गया। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान कपकोट के वीर सपूत हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दे दिया कम6शामी ने जवान की शहादत पर शोक व्यक्त किया है। मंगलवार को इलंक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाएंगे।
व्हाइट नाइट कोर ने 19 जनवरी को एक्स (ट्विटर) पर ट्वीट कर 43 वर्षीय हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी। ट्वीट में कहा गया कि जनरल ऑफिसर कमांडिंग, व्हाइट नाइट कोर और सभी रैंकों ने स्पेशल फोर्स के हवलदार गजेंद्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
कोर ने बताया कि हवलदार गजेंद्र सिंह ने 18-19 जनवरी की रात को सिंगपोरा इलाके में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बहादुरी से कार्रवाई करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। पोस्ट में उनके साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए शोकाकुल परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही गई।
सुरक्षा बलों के अधिकारियों के मुताबिक चत्रू क्षेत्र के मंद्रल-सिंह पोरा के पास सोनार गांव में रविवार को आतंकियों के खिलाफ अभियान शुरू हुआ था। इसी दौरान आतंकियों की तरफ से अचानक ग्रेनेड हमला किया गया, जिसकी चपेट में सैनिक आ गए।
अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में 8 सैनिक घायल हुए थे। हमला होते ही सैनिकों को छर्रे लगे जिससे कई जवान घायल हो गए। इसी अभियान के दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सैन्य अधिकारियों के मुताबिक घायल जवानों में हवलदार गजेंद्र सिंह ने 18 और 19 जनवरी की रात को एक सैन्य अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। इसके बाद उनकी शहादत की खबर जैसे ही उत्तराखंड पहुंची, गांव और परिवार में कोहराम मच गया।
अभियान दोबारा शुरू, घने जंगल और खड़ी ढलानों में सर्च ऑपरेशन अधिकारियों के मुताबिक ग्रेनेड धमाके के बाद अभियान को रविवार देर रात रोक दिया गया था। इसके बाद सोमवार सुबह से घने जंगल और खड़ी ढलान वाले चुनौतीपूर्ण इलाके में इसे फिर से शुरू किया गया है।
बताया गया कि सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की कई टीमें इलाके की तलाशी ले रही हैं। लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इलाके में कड़ी सुरक्षा घेराबंदी की गई है, ताकि आतंकवादी भाग न सकें। अधिकारियों के मुताबिक इलाके में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 2 से 3 आतंकवादियों का एक समूह फंसा हुआ है। इसी को लेकर ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ नाम से संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि यह मुठभेड़ इस साल जम्मू क्षेत्र में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीसरी झड़प है।
हवलदार गजेंद्र सिंह के शहीद होने की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे। शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाते हुए लोगों ने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी। गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन नजर आया और हर आंख नम थी।
हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया के परिवार में उनके पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंदा गढ़िया, पत्नी लीला गढ़िया और दो पुत्र हैं। बड़ा पुत्र राहुल गढ़िया है, जबकि छोटा पुत्र धीरज गढ़िया कक्षा 4 में पढ़ता है और अपनी मां के साथ देहरादून में रहता है।
शहीद की वीरांगना हेलिकॉप्टर से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचीं।
जवान की पत्नी लीला गढ़िया दोनों पुत्रों के साथ हेलिकॉप्टर से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड पहुंचीं। वहां से उन्हें कपकोट ले जाया गया। परिजनों के अनुसार पत्नी बार-बार बेसुध हो रही हैं, जबकि मासूम बच्चे पिता को याद कर उनसे लिपटकर फूट-फूट कर रो रहे हैं। गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
शहीद के छोटे भाई किशन सिंह ने बताया कि गजेंद्र सिंह गढ़िया शुरू से ही देश सेवा के प्रति समर्पित थे और वे हमेशा अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देते थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी शहीद की वीरता को नमन किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीर जवान के बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीद के परिवार के प्रति संवेदना जताई और दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहने की बात कही है।
