देहरादून
उत्तराखंड वन विभाग द्वारा दिनांक बुधवार को आईसीएफआरआई, देहरादून में पहली बार वनाग्नि नियंत्रण, शमन एवं प्रबंधन हेतु अंतर्विभागीय समन्वय बैठक 2026 का सफल आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (PCCF) एवं हॉफ (HoFF), उत्तराखंड द्वारा की गई।
बैठक में एस.पी. सुबुद्धि (SP Subudhi), PCCF,डॉ. विवेक पांडे, APCCF, मीनाक्षी जोशी, अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (APCCF) तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं संबंधित विभागों के अधिकारीगण एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यह बैठक राज्य में वनाग्नि की बढ़ती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने तथा विभिन्न विभागों के मध्य समन्वित कार्यप्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस बैठक में उत्तराखंड वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सूवना विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), वन सर्वेक्षण भारत (FSI), भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE), वन अनुसंधान संस्थान (FRI), यूकॉस्ट (UCOST), यूरेडा (UREDA), सूबना विभाग रेड क्रॉस सोसाइटी, शिक्षा विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। विभिन्न विभागों की उपस्थिति राज्य सरकार की बहु क्षेत्रीय एवं समन्वित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
बैठक के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें उत्तराखंड में वनाग्नि की वर्तमान स्थिति, संवेदनशील क्षेत्र, जोखिम मानचित्रण तथा पूर्व वर्षों के अनुभवों पर प्रकाश डाला गया।
प्रस्तुति में पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, वास्तविक समय निगरानी तंत्र, सामुदायिक सहभागिता तथा त्वरित प्रतिक्रिया दलों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया
मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) ने वनाग्नि नियंत्रण, शमन एवं प्रबंधन हेतु अंतर्विभागीय समन्वय तंत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें निम्न बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया…
👉मौसम विभाग (IMD) के साथ समन्वय कर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ करन
,👉 FSI एवं उपग्रह आधारित फायर अलर्ट सिस्टम के माध्यम से निगरानी तंत्र को मजबूत करना
👉 संयुक्त नियंत्रण कक्ष एवं संचार नेटवर्क के माध्यम से त्वरित कार्रवाई
👉 आपात स्थिति में NDRF, SDRF एवं अन्य विभागों के मानव संसाधन एवं उपकरणों की प्रभावी तैनाती
👉 स्वास्थ्य विभाग एवं रेड क्रॉस के माध्यम से आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना
👉 शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालय स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम
👉 यूकॉस्ट, FRI एवं ICFRE के सहयोग से वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग
👉 यूरेडा के सहयोग से वैकल्पिक ऊर्जा एवं सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा
👉 मैदानी कार्मिकों हेतु संयुक्त प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण
बैठक में विभिन्न विभागों की भूमिका एवं उत्तरदायित्व मानक तैयार करने पर भी चर्चा की गई। संसाधनों के साझा उपयोग, आपदा की स्थिति में त्वरित समन्वय, कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
वनाग्नि की रोकथाम के लिए अग्नि रेखाओं का रख-रखाव, नियंत्रित दहन, ज्वलनशील पदार्थों की सफाई, ग्राम स्तर पर वनाग्नि सुरक्षा समितियों की सक्रिय भागीदारी तथा व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया गया। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा जिला एवं विकासखंड स्तर पर पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक में सभी विभागों द्वारा उत्तराखंड वन विभाग को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया गया तथा यह निर्णय लिया गया कि वनाग्नि सत्र से पूर्व एवं उसके दौरान नियमित समन्वय बैठके आयोजित की जाएंगी।
प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (PCCF) हॉफ (HoFF), उत्तराखंड वन विभाग ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध वन संपदा, जैव विविधता एवं वन्यजीव राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। इनकी सुरक्षा हेतु समन्वित प्रयास, आधुनिक तकनीक का उपयोग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों के सक्रिय सहयोग की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से राज्य को वनाग्नि की घटनाओं से प्रभावी रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (PCCF) हॉफ (HoFF), अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि वनाग्नि की प्रभावी रोकथाम से राज्य में चल रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के मैदानी स्तर पर कार्यरत कार्मिक वन रक्षक, बीट अधिकारी तथा अन्य फील्ड स्टाफ इस दिशा में सबसे सक्रिय भूमिका निभाते हैं। विभाग इन कार्मिकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर वनाग्नि रोकथाम संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बना सकता है। साथ ही, सभी लाइन विभागों द्वारा मॉक ड्रिल में सक्रिय सहभागिता से वनाग्नि की रोकथाम एवं आपदा-तत्परता (preparedness) को सुदृढ़ किया जा सकता है।
उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी विभागों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा उत्तराखंड के वनों को वनाग्नि से सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प को दोहराया।

