देहरादून
मंगलवार 31 मार्च को विश्वभर में Transgender Day of Visibility मनाया गया जो ट्रांसजेंडर, नॉन-बाइनरी और LGBTQ+ समुदाय को पहचान, सम्मान और अधिकारों को मान्यता देने का दिन है। लेकिन इस वर्ष देहरादून में इस दिन को उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि विरोध और जागरूकता के रूप में मनाया गया।
मौके पर बताया गया कि 30 मार्च 2026 को द्रौपदी मुर्मू द्वारा ट्रांसजेंडर अमेंडमेंट बिल 2026 को मंजूरी दी गई है। जिसके बाद, देहरादून में ट्रांसजेंडर, हिजड़ा, LGBTQ+ एवं नॉन-बाइनरी समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया।
यह विरोध उत्तराखंड महिला मंच एवं उत्तराखंड इंसानियत मंच के समर्थन से आयोजित किया गया, जिसमें पूरे उत्तराखंड से बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहनकर
बूढ़ा बोले, बोले बच्चा– ट्रांस बिल है सबसे कच्चा जैसे नारे लगाए और
यह संदेश दिया कि यह दिन उनकी पहचान के उत्सव का था, लेकिन सरकार के इस निर्णय ने इसे उनके अधिकारों के हनन के प्रतीक में बदल दिया है।
समुदाय ने स्पष्ट रूप से कहा कि LGBTQ+ और नॉन-बाइनरी व्यक्ति भी समाज का समान और सम्मानित हिस्सा हैं। नॉन-बाइनरी वे लोग होते हैं जो खुद को केवल “पुरुष” या “महिला” की पारंपरिक श्रेणियों में सीमित नहीं मानते, बल्कि अपनी एक अलग और वैध पहचान रखते हैं। ऐसे में कोई भी कानून जो पहचान को सीमित करता है या मेडिकल जांच जैसी बाध्यता लगाता है, वह उनकी स्व-पहचान (self-identification) और राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन है।
कहा गया कि यह बिल NALSA v. Union of India के ऐतिहासिक फैसले के विपरीत है, जिसमें ट्रांसजेंडर और जेंडर-डायवर्स व्यक्तियों को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता देते हुए उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा की गई थी।
इस अवसर पर समुदाय के लोगो के साथ ही कई गैरराजनैतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गांधी पार्क से परेड ग्राउंड तक एक शांतिपूर्ण मार्च निकाला और ट्रांसजेंडर बिल की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया गया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वह समुदाय पर प्रतिबंध और नियंत्रण लगाने के बजाय उनकी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान दे। 2014 के बाद समाज में जो स्वीकार्यता धीरे-धीरे बढ़ रही थी, इस बिल के बाद उसके प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई।
मौके पर बताया गया कि इस मामले में 6 अप्रैल 2026 को जंतर मंतर, नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से ट्रांसजेंडर, हिजड़ा, LGBTQ+ और नॉन-बाइनरी समुदाय के लोग एकजुट होंने जा रहे हैं।
इस दौरान प्रियांशु,शमन,ओशिन सरकार,तान्या, गोरी, नैना, अनुभव, सौरव, संगीता, अलीशा, करिश्मा तथा हरिद्वार से पीहू, काजल, प्रिया, आलिया, करन सहित अनेक सदस्य और इनके समर्थन में आए कमला पंत, उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड इंसानियत मंच से जुड़े रवि चोपड़ा और सदस्य एवं समुदाय के अन्य लोगों ने भी अपनी एकजुटता और समर्थन दर्ज कराया गया।
