देहरादून/नरेंद्र नगर,(टिहरी गढ़वाल)
उत्तराखंड और देश के साथ ही विदेशों की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया सोमवार 7 अप्रैल से विधिवत शुरूआत कर दी गई।
भगवान बदरी विशाल की नित्य महाभिषेक पूजा में उपयोग होने वाले पवित्र तिलों के तेल को टिहरी राजदरबार में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पिरोने का कार्य आरंभ हुआ।
इस विशेष अनुष्ठान में माला राज्य लक्ष्मी शाह सहित अन्य सुहागिन महिलाओं ने भाग लिया और परंपरा के अनुसार तिलों से पवित्र तेल तैयार किया।
डिमरी पुजारी समुदाय के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि 8 अप्रैल से गाडू घड़ा कलश यात्रा शुरू होगी।
इस अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी शामिल होंगे, जिससे आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाएगा।
तैयार किया गया पवित्र तिल का तेल गाडू घड़ा कलश में भरकर शोभायात्रा के साथ नरेंद्र नगर से बदरीनाथ धाम के लिए रवाना किया जाएगा।
22 अप्रैल को धाम पहुंचेगी यात्रा, 23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट
यह यात्रा दो चरणों में विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए डिमरी पुजारियों के मूल ग्राम डिम्मर पहुंचेगी और फिर आगे बढ़ते हुए 22 अप्रैल को बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। इसके बाद 23 अप्रैल 2026 को प्रातः 6:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
कपाट खुलने के साथ ही इस पवित्र तेल कलश को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिल के तेल से भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाता है, जो पूरे वर्ष चलने वाली पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा मंदिर में प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति में भी इसी तेल का विशेष उपयोग होता है।
मौसम भी बना आस्था का साक्षी
कार्यक्रम के दौरान सुबह मौसम प्रतिकूल था और हल्की बूंदाबांदी हो रही थी।
लेकिन जैसे ही कृष्ण प्रसाद उनियाल द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई और महिलाओं ने पारंपरिक उपकरणों से तेल पिरोना शुरू किया।
वैसे ही मौसम साफ हो गया। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान बदरी विशाल की कृपा माना और उत्साह के साथ जयकारे लगाए।
