देहरादून
ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) के आह्वान पर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन (SBISA) देहरादून मॉड्यूल के पदाधिकारियों ने बुधवार को सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह और माननीय सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यालय में जाकर बैंक प्रबंधन की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा और आगामी 25 व 26 मई 2026 को होने वाली दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बारे में सूचित किया।
सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से फेडरेशन ने निम्नलिखित गंभीर समस्याओं पर सांसदों के हस्तक्षेप की मांग की है…
👉भर्ती में रोक और आउटसोर्सिंगः पिछले 29 वर्षों से मैसेंजर के पदों पर कोई भर्ती नहीं की गई है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों और शिक्षित युवाओं को रोजगार से वंचित किया जा रहा है।
👉सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थित स्पष्ट नहीं: सशस्त्र गार्डों (Armed Guards) की भर्ती न होने से बैंक की सुरक्षा और सार्वजनिक धन जोखिम में है।
👉NPS में भेदभावः अन्य सार्वजनिक बैंकों के विपरीत, एसबीआई कर्मचारियों को उनके एनपीएस (NPS) फंड मैनेजर को चुनने या बदलने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जो कि वित्त मंत्रालय के निर्देशों का उल्लंघन है।
👉स्थानांतरण नीतिः बैंक प्रबंधनने द्वारा 2019 के बाद शामिल हुए कर्मचारियों के लिए द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करते हुए ‘इंटर सर्कल ट्रांसफर’ को एकतरफा रोक दिया है।
यूनियन पदाधिकारियों ने ज्ञापन के द्वारा सांसदों से आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें व माननीय वित्त मंत्री, वित्तीय सेवा विभाग, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा भारत सरकार के अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर बैंक प्रबंधन को सार्थक वार्ता कर इन लंबित मुद्दों को हल करने के लिए निर्देशित करें। यदि प्रबंधन का अड़ियल रवैया जारी रहा, तो 25 और 26 मई को होने वाली इस हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं में होने वाली किसी भी असुविधा के लिए प्रबंधन स्वयं जिम्मेदार होगा।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में निम्नलिखित पदाधिकारी शामिल रहे जिनमें कमल तोमर के साथ ही अनिल शर्मा अभिलेख थापा सौरभ पुंडीर एवं राजकुमार गर्ग आदि मौजूद रहे।