बदलाव..पुजारी पहनेंगे बिना जेब वाला कुर्ता और चढ़ावे पर रहेगी CCTV की नजर,पारदर्शिता के लिए 7 सदस्यीय कमेटी गठित,श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता..रविन्द्र पूरी

देहरादून/ हरिद्वार

अब मंदिरों के चढ़ावे को लेकर मनसा देवी मंदिर प्रबंधन ने नियमों में तब्दीली करने की कवायद शुरू हो गई है। जिसके लिए बाकायदा पुजारियों के पहनावे में जेब को समाप्त करने पर जोर दिया जा रहा है।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की जा रही है।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना और मंदिर की गरिमा की रक्षा करना ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति की गलती से पूरे मंदिर प्रबंधन की छवि प्रभावित होती है, इसलिए व्यवस्थाओं में सुधार के तहत नया ड्रेस कोड और निगरानी प्रणाली लागू की गई है।

ट्रस्ट के निर्णय के अनुसार अब सभी पुजारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनकर ही सेवा देंगे। ट्रस्ट का मानना है कि इससे चढ़ावे को लेकर किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की संभावना कम होगी तथा सभी पुजारियों की एक समान वेशभूषा से अनुशासन और व्यवस्था भी मजबूत होगी।

चढ़ावे के संग्रह और प्रबंधन की निगरानी के लिए गठित सात सदस्यीय समिति को निष्पक्षता, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखा जाए और उसके प्रबंधन में किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से चढ़ावे और उससे जुड़ी सभी गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। समिति समय-समय पर व्यवस्थाओं की समीक्षा भी करेगी, ताकि तकनीक और मानवीय निगरानी के संयुक्त उपयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

ट्रस्ट अध्यक्ष रविंद्र पुरी ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं लिया गया है। इसका उद्देश्य केवल मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाना है।

गौरतलब है कि मनसा देवी मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन और चढ़ावा अर्पित करने पहुंचते हैं।

नवरात्र और अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में ट्रस्ट का मानना है कि नई व्यवस्था से चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं का भरोसा दोनों और मजबूत होंगे।

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