देहरादून
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर, टपकेश्वर महादेव, देहरादून में विशेष शारदीय नवरात्रि पूजा-अनुष्ठान श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया गया। इस अवसर पर मंदिर में विराजमान माता वैष्णो देवी की मां काली, लक्ष्मण एवं सरस्वती की प्रतीक पिंडियों तथा अष्टभुजी मां दुर्गा की प्रतिमा को पवित्र गंगाजल से स्नान एवं अभिषेक करवाया गया। इसके पश्चात देवी-देवताओं को नवीन वस्त्र एवं आभूषण धारण करवाकर विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना की गई।
मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा। मां दुर्गा की आराधना, वैदिक मंत्रोच्चार, दुर्गा सप्तशती के पाठ तथा भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।
मंदिर के संस्थापक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने बताया कि शारदीय नवरात्रि भारतीय सनातन संस्कृति, शक्ति उपासना और नारी शक्ति के सम्मान का विशेष पर्व है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ समाज में सदाचार, आत्मसंयम, सेवा, संस्कार एवं सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि धर्मनगरी हरिद्वार से पधारे आचार्य विनीत बडोनी के सानिध्य में पांच ब्राह्मणों द्वारा विधिवत श्री दुर्गा सप्तशती का पाठकिया गया। वैदिक मंत्रों एवं देवी स्तुति के साथ विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि, शांति तथा सभी के उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की गई।
सायंकाल में स्थानीय महिला भजन-कीर्तन मंडली द्वारा मां दुर्गा की महिमा पर आधारित सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई। इसके पश्चात माता वैष्णो देवी का विशेष श्रृंगार किया गया तथा विधिवत आरती संपन्न हुई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने शीश नवाकर परिवार, समाज एवं राष्ट्र की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की।
योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी ने सभी श्रद्धालुओं, ब्राह्मणों, भजन-कीर्तन मंडली एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नवरात्रि का वास्तविक संदेश शक्ति की उपासना के साथ अपने भीतर के सद्गुणों को जागृत करना, बुराइयों का त्याग करना तथा समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और संस्कारों की स्थापना करना है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा की आराधना के साथ अपने जीवन में योग, ध्यान, अनुशासन, सकारात्मक चिंतन एवं मानवीय मूल्यों को अपनाएं, ताकि स्वस्थ, संस्कारित और सद्भावपूर्ण समाज के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका निभा सके।
इस अवसर पर उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के सदस्य हरिचंद सेमवाल, मंदिर के संस्थापक योगाचार्य डॉ. बिपिन जोशी, डॉ. मथुरा दत्त जोशी, भगवती जोशी, गीता जोशी, ऋषिपाल, हर्षपति रयाल, आचार्य आयुष पोखरियाल, सुशील पुरोहित सहित अन्य श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं की विशेष उपस्थिति और सहयोग रहा।
