देहरादून/हल्द्वानी
साइबर ठगों के जाल में बैंक खाते और लिंक लोगों की कमाई पर भारी पड़ रहे हैं। हल्द्वानी में सामने आए दो अलग-अलग मामलों में करीब 4.34 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी और संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आई है। मुखानी में एक व्यक्ति के खाते से फिशिंग लिंक के जरिए करीब 3.94 लाख रुपये निकलने की शिकायत है, जबकि काठगोदाम में एक युवक के खाते में पहुंचे ठगी के 40 हजार रुपये चेक से निकालने का मामला जांच में सामने आया है। दोनों मामलों में पुलिस ने मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुखानी थाना क्षेत्र के सरस्वती विहार निवासी तारा सिंह बिष्ट के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से चार बार में कुल 3,93,933.76 रुपये निकाले जाने की शिकायत सामने आई है। पीड़ित के मुताबिक, एक लिंक के जरिए उसके साथ धोखाधड़ी हुई। रकम गायब होने का पता चलने पर उसने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
साइबर सेल में शून्य प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामला मुखानी थाने पहुंचा। 24 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों में गई और इस साइबर ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं। पीड़ित ने रकम वापस दिलाने की मांग की है।
उधर, काठगोदाम क्षेत्र में साइबर सेल की हॉटस्पॉट जांच के दौरान सुनील कुमार निवासी देवलातल्ला, पजाया, बागजाला का बैंक खाता संदिग्ध पाया गया। पुलिस के अनुसार, दो सितंबर को उसके खाते में साइबर ठगी से जुड़े 40 हजार रुपये पहुंचे थे। आरोप है कि सुनील ने उसी दिन चेक के जरिए मुंबई की बोरिबनी शाखा से पूरी रकम निकाल ली।
जांच में खाताधारक रकम के स्रोत और उसे निकालकर इस्तेमाल करने के संबंध में संतोषजनक जवाब या साक्ष्य नहीं दे पाया। पुलिस के मुताबिक, सुनील सोलर लाइट की मार्केटिंग का काम करता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी संबंधित रकम को लेकर शिकायत दर्ज मिली है।
पुलिस की जांच में खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन और निकासी के लिए किए जाने की आशंका सामने आई है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को आगे भेजने या नकदी निकालने के लिए किया जाता है। काठगोदाम कोतवाली में 25 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया गया।
दोनों मामलों में पुलिस लेनदेन की कड़ियां जोड़ने, रकम के स्रोत का पता लगाने और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।