देहरादून
करीब 23 साल पुराने जैनी प्रकरण शनिवार को नया मोड़ दिखा जब अब तक बच्चे के पितृत्व और डीएनए जांच को लेकर चर्चा में रहे इस मामले में जैनी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से एक पत्रकार वार्ता के दौरान अपनी आपबीती बयां करते हुए पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म, यौन शोषण और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए।
जैनी का दावा है कि कथित घटनाओं के समय उनकी उम्र केवल 16 साल ही थी।
शनिवार को ही उन्होंने डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात कर पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही अपने बेटे का दोबारा डीएनए और नार्को टेस्ट कराने की मांग की।
जैनी के अनुसार, वह मॉडलिंग में करियर बनाने के लिए देहरादून आई थीं। काम न मिलने पर उन्होंने एक एसटीडी बूथ पर नौकरी शुरू कर दी। इसी दौरान एक कांग्रेस नेता के माध्यम से उन्हें हरक सिंह रावत के घर पर काम मिला। उनका आरोप है कि इसके बाद नौकरी दिलाने के नाम पर उन्हें कई जगह ले जाया गया और इसी दौरान उनके साथ दुष्कर्म किया गया।
जैनी ने आरोप लगाया कि बेटे को पिता का नाम और पहचान दिलाने की बात उठाने पर भी उनका शोषण जारी रहा। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पागलखाने में रखवाया गया। उनका दावा है कि वहां उनसे जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। जैनी का कहना है कि उस समय उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिस कारण वह सीबीआई जांच के दौरान अधिकारियों के सामने भी अपनी बात ठीक से नहीं रख पाई थीं।
बेटे को आज भी पिता के नाम और पहचान का इंतजार
भावुक होकर जैनी ने कहा कि उनका बेटा अब 23 साल का हो चुका है, लेकिन आज भी पिता के नाम और पहचान से वंचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरक सिंह रावत ने कभी उनके और बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी नहीं उठाई। जैनी ने पूर्व में हुई डीएनए जांच पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसमें गड़बड़ी हुई थी। इसी आधार पर उन्होंने बेटे का दोबारा डीएनए टेस्ट कराने और नार्को टेस्ट की मांग की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के डीएनए टेस्ट की मांग से जुड़े सवाल पर जैनी ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह महेंद्र भट्ट को जानती तक नहीं हैं। उनका मुद्दा अपने और बेटे के साथ हुए कथित अन्याय का है।
जैनी ने शनिवार को डीजीपी से मुलाकात कर शिकायती पत्र सौंपा। उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही पूरे प्रकरण की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया।
वर्ष 2003 में जैनी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत पर अपने बच्चे का पिता होने का आरोप लगाया था। मामला विधानसभा में गूंजने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया था और हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी की सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। सीबीआई ने 25 जुलाई 2003 को दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था।
जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत के डीएनए नमूनों का मिलान नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद हरक सिंह रावत को इस मामले में राहत मिली थी।
हालांकि इसके जवाब में पूर्व मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने अपना पक्ष रखते हुए और सफाई देते हुए कहा कि मैने ही जेनी के इस आरोप के बाद स्वयं इस्तीफा दिया था और कहा था कि जब तक दूध का दूध पानी का पानी नहीं हो जाता विधानसभा में पैर नहीं रखूंगा। मैने सीबीआई केस से बरी होने के बाद विजया बड़थ्वाल,आशा नौटियाल और जेनी के खिलाफ मानहानि का केस भी दर्ज कराया था। परन्तु उस समय भगत सिंह कोश्यारी के कहने पर सीजीएम कोर्ट से केस वापस लिया था।परन्तु अब मैं कहना चाहता हु कि मैने अपने वकीलों से बात की है मेरे खिलाफ जो भी मेरी अवमानना करेगा खिलवाड़ करने की कोशिश करेगा उसके खिलाफ अवमानना का केस होगा। हरक सिंह रावत घबराने वाला नहीं हे जब तक अंकिता के माता पिता और प्रिया थापा को न्याय नहीं मिल जाता ये लड़ाई जारी रहेगी।