देहरादून
अंकिता न्याय संयुक्त संघर्ष मंच 26 फ़रवरी को गांधी पार्क से अंकिता हत्या कांड मुद्दे पर राज्यपाल से मिलने की मांग को लेकर एक मौन मार्च निकालेगा। हर जिला मुख्यालय/शहर/ ब्लॉक मुख्यालयों में भी न्याय पंचायत आयोजित की जाएंगी जिसकी शुरुआत बजट सत्र दौरान गैरसैण से की जाएगी I अंकिता न्याय संघर्ष को उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के सवाल पर केंद्रित किया जाएगा I
इस क्रम में इसे उत्तराखंड में होटल रिसोर्ट – नशा संस्कृती के चलते महिला यौन शोषण , बढ़ते अपराध व इंसानियत विरोधी कृत्यों पर भी केंद्रित किया जाएगा। वन्य जीवों के आतंक से मानव जीवन पर उठ रहे खतरे विशेष कर महिला सुरक्षा सवाल को भी पुरजोत तरीके से उठाया जाएगा।
आज शहीद स्मारक में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सक्रिय कार्यकर्ताओं की बैठक में , अंकिता हत्याकांड की CBI जांच को जिस प्रकार से सरकार ने अपने करीबी अनिल जोशी के द्वारा दर्ज करायी FIR पर CBI जांच शुरू कारवाई है , उसे लेकर सभा में सभी ने तीव्र रोष व्यक्त किया। इस क्रम में जो याचिका मंच द्वारा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 40 पृष्ठों में सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षरों से भेजी गई है, उसे सार्वजनिक रूप से रिलीज किया।
बैठक में वक्ताओं ने इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया कि राज्यपाल महोदय से मुलाकात हेतु तीन बार फोन किए गए तथा मंच की ओर से वरिष्ठ साथी ब्रिगेडियर डंगवाल द्वारा दो बार ईमेल पत्र भेज कर भी मिलने का समय मांगा गया , परंतु राजपाल की ओर से समय तो नहीं ही दिया गया पर जिस तरह से किसी फोन / ईमेल का उत्तर तक भी नहीं दिया गया।
संयुक्त संघर्ष मंच ने घोषणा की, कि उसका यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि उन VIP जिनकी वजह से अंकिता की हत्या हुई और जिनके नाम भी अब खुलकर चर्चा में है, उनके बारे में और सबूतों को मिटाने वालों के
विरुद्ध जांच हो कर उन्हें दंड नहीं मिल जाता है, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। ताकि राज्य में आगे से महिलाएं सुरक्षित रह सके और राज्य में निरंतर बढ़ते हुए अपराधों पर नियंत्रण कायम हो सके।
आशा व्यक्त की गई कि इस प्रतीकात्मक मौन मार्च के बाद राज्य पाल 5 सदस्यीय मंच के प्रतिनिधि मंडल को मुलाकात का समय जरूर देंगे व इस तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेंगे I
