देहरादून
रविवार को देवभूमि उत्तराखण्ड भ्रमण पर पहुंचे कृष्ण नगरी श्री रमण रेती धाम(मथुरा गोकुल) से परमश्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी गुरुशरणानंद महाराज ने कालिका मंदिर में प्रवास किया। उन्होंने भोले बाबा का अभिषेक करने के पश्चात दैनिक सत्संग हॉल में श्री महाराज को प्रणाम व पुष्प अर्पण करके व्यासपीठ पर विराजमान हुए।
शिवनगरी काशी की महान दिव्य विभूति परमश्रद्धेय महामंडलेश्वर स्वामी श्री ज्योतिर्मयानंद महाराज एवं देवभूमि उत्तराखंड राज्य की सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थली हरिद्वार से परमश्रद्धेय श्री महंत विष्णुदास महाराज पहुंचे ।
संतों ने मौजूद श्रद्धालुओं को अपने आशीर्वचन में बताया कि हम सभी भाग्यशाली हैं,आज हम प्रकृति की मूल मां शक्ति के रूप में उनके चरणों में बैठे हैं । मां की कोई उपमा नहीं होती क्योंकि उप की कोई मां नही होती। उन्होंने बताया कि कृपा तीन प्रकार की होती ईश्वरीय कृपा, सदगुरु की कृपा और आत्म कृपा। ईश्वर की कृपा से सन्त मिलते हैं और संत कृपा से ही आत्म कृपा होती है । हमें अपने जीवन को बदलने का प्रयास करना चाहिए। विश्वास होने से ही श्रद्धा जागृत होती है।
रमणरेती वृंदावन धाम से पधारे जगतगुरु श्रीगुरु शरणानंद महाराज ने सर्वप्रथम ठाकुर हमरे रमण बिहारी हम हैं रमन बिहारी के साधु सेवा धर्म हमारा काम न दुनियादारी से कोई भला कहे या बुरा कहे हम हो गए रमन बिहारी के भजन गाकर सबको भाव विभोर कर दिया तत्पश्चात उन्होंने कहा ने कहा श्रद्धा और ज्ञान दोनों अलग अलग है श्रद्धा होंगी तभी ज्ञान प्राप्त होगा वो केवल गुरु ही कर सकता है. सबके ज्ञान के स्रोतरत बोले नाथ है. जितना तुम्हारा समर्पण है उतना तुम्हारा गुरु जरूर देता है।
इस अवसर पर जयकिशन कक्कर, संजीव शर्मा, केवल आनंद, उमेश मिनोचा, सतीश कक्कर, कुंवर राजेंदर वर्मा, अमित भाटिया, सतीश मेहता, सुदर्शन जग्गी, अमित सूरी, साहिल आहूजा, नरेश मैनी, संजय आनंद व अपार भक्त समाज उपसित था।