नैनीताल,मसूरी में बर्फबारी न होने से चोटियां स्याह दिखी रही, सैलानी और कारोबारियो के चेहरे पर मायूसी आई नजर – Latest News Today, Breaking News, Uttarakhand News in Hindi

नैनीताल,मसूरी में बर्फबारी न होने से चोटियां स्याह दिखी रही, सैलानी और कारोबारियो के चेहरे पर मायूसी आई नजर

देहरादून/नैनीताल

नैनीताल हो या मसूरी इस बार की सर्दियों का मौसम आके जाने को तैयार है परंतु बर्फ गिरने जैसी चीज दूर दूर तक नजर आने को तैयार नहीं दिख रही है।

पहाड़ों की रानी मसूरी और नैनीताल जैसे पर्यटक स्थल सूने दिख रहे हैं। हिमालय दर्शन से दिखाई देने वाली हिमालय की बर्फीली चोटियां अब सफेद की जगह स्याह नजर आने लगी हैं। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ तौर पर हिमालय पर स्पष्ट दिख रहा है। जो पहाड़ कभी साल के इस समय तक बर्फ की सफेद चादर से ढके रहते थे,वे अब लगभग खाली होने के साथ साथ सूखे नजर आ रहे हैं। केवल ऊंची चोटियों पर ही हल्की-सी बर्फ की लाइन जरूर नजर आ रही है, जो सैलानियों की उम्मीदों को पूरा करने में नाकाम साबित हो रही है।

प्रदेश के साथ साथ दुनिया भर में जनवरी के महीने को आमतौर पर बर्फबारी के लिए जाना जाता रहा है, इस बार बिना बर्फ के ही गुजरता नजर आ रहा है। दूर-दराज से नैनीताल और हिमालय दर्शन पहुंचे पर्यटक बर्फ देखे बिना ही मायूस होकर लौट रहे हैं। मौसम के इस बदले मिजाज से सिर्फ सैलानी ही निराश नहीं हैं बल्कि पर्यटन से जुड़े व्यवसाय पर भी बहुत गहरा असर डाला है।

पहले बर्फबारी के दौरान भारी संख्या में सैलानी नैनीताल, किलबरी और पंगोट रोड जैसे इलाकों में पहुंचते थे, जिससे होटल, टैक्सी, फोटोग्राफी और छोटे व्यापारियों की अच्छी आमदनी होती थी। लेकिन इस बार बर्फ न गिरने के कारण पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।

स्थानीय होटल व्यवसाई दीपक शर्मा का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से मौसम में लगातार असंतुलन होने से

बर्फबारी नही हो रही है। जिससे इन दिनों पर्यटकों से भरे होटल सुनसान नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले किलबरी और पंगोट रोड पर बर्फ गिरती थी, जिससे बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे और हिमालय दर्शन क्षेत्र में कारोबार बढ़ता था। लेकिन अब बर्फ न गिरने से काफी नुकसान हो रहा है। व्यापार पूरी तरह से चौपट हो रहा है।

वहीं अधिवक्ता और समाजसेवी संध्या शर्मा बताती हैं कि इन कुछ सालों में ही मौसम बदला है उसकी वजह बढ़ते वाहन, कंक्रीट के जंगल का लगातार बढ़ते जाना भी है। आज हिमालय खाली नजर आ रहा है, जो चिंता का विषय है। सामाजिक लोगो और सरकार को इस पर मंथन करना होगा।

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