शिव शक्ति सेवा एवं जनकल्याण समिति एवं टपकेश्वर महादेव सेवा दल द्वारा शनि देव शिला स्थापना व भव्य भंडारा संपन्न – Latest News Today, Breaking News, Uttarakhand News in Hindi

शिव शक्ति सेवा एवं जनकल्याण समिति एवं टपकेश्वर महादेव सेवा दल द्वारा शनि देव शिला स्थापना व भव्य भंडारा संपन्न

देहरादून

शनिवार को श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्रांगण में शिव शक्ति सेवा एवं जनकल्याण समिति एवं टपकेश्वर महादेव सेवा दल के संयुक्त तत्वावधान में भगवान श्री शनि देव महादेव की शिला स्थापना विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत रूप से संपन्न हुई।

इस अवसर पर शनि भक्तों द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन में श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णागिरी महाराज, दिगंबर भारत गिरी महाराज, राजपाल गिरी महाराज, रवि गिरी, सोहन गिरी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। संतों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर धर्म व सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

महंत कृष्णागिरी महाराज ने कहा, भगवान श्री शनि देव न्याय, कर्म और अनुशासन के प्रतीक हैं। शनि देव की शिला स्थापना से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। ऐसे आयोजन समाज में सद्भाव, सेवा और सनातन परंपराओं को सुदृढ़ करते हैं।”

कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा, श्रीटपकेश्वर महादेव मंदिर देवभूमि की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने, भाईचारे को मजबूत करने और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।

इस अवसर पर सेवादार एवं आयोजक सिकंदर सिंह ने कहा, शिव शक्ति सेवा एवं जनकल्याण समिति एवं टपकेश्वर महादेव सेवा दल का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज में सेवा, समरसता और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ाना है। शनि देव शिला स्थापना और भंडारे के माध्यम से श्रद्धालुओं की आस्था को सशक्त करने का यह एक छोटा सा प्रयास है। हम सभी सहयोगकर्ताओं, संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सिकंदर सिंह, राकेश दिलावरी, अरुण मारवाह, ईशांत, धीरज, शुभम, पवन, रुद्र, मदन, आशीष एवं सारथी घई का विशेष योगदान रहा।

यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण बना, जिसमें धर्म के साथ जनकल्याण की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

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