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संयुक्त नागरिक संगठन ने की भ्रष्टाचारियों के खिलाफ गोष्ठी,विभिन्न संगठन आए सामने

देहरादून

राज्य में भर्तचारियों के खिलाफ आमजन सामने आ रहा है जो जागरूकता का प्रतीक भी है।

सोमवार को संयुक्त नागरिक संगठन ने इस मामले पर एक गोष्ठी आयोजित की।

जन सहयोग के बिना भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड की अवधारणा को धरातल पर उतारा जाना संभव नहीं है। राज्य को रिश्वतखोरी, जबरन वसूली,धोखाधड़ी,सरकारी धन का गबन,भू माफियाओ के काले कारनामों जैसे अपराधों से आजाद करने के लिए सरकारी व्यवस्थाएं विभाग पूर्ण रूप से सफल नहीं हुए हैं। उत्तराखंड की स्थापना का मुख्य कारण भी यही था कि यहां के पर्वत मैदान के लोग ईमानदार नौकरशाही सरकारी व्यवस्थाओं के साथ सुकून का अनुभव कर सकेंगे।

भ्रष्टाचार से लड़ने और ईमानदारी को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री को अब नए कदम उठाने ही होंगे। शिकायत पोर्टल से काम नहीं चलेगा। विभागों में जवाबदेही की नई प्रणाली विकसित करनी होगी। अन्यथा आम जनजीवन में फैले इस नासूर का इलाज असंभव है। ये विचार अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन के तत्वाधान में भ्रष्टाचार बनाम ईमानदारी विषय पर सुझाव संकलन के उद्देश्य से आयोजित गोष्ठी में सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि वक्ताओं ने अभिव्यक्त किये। मुख्य अतिथि चित्रांचल कल्याण समिति के संरक्षक चंद्रगुप्त विक्रमादित्य थे। संचालन नवीन कुमार सडाना ने किया।वक्ताओं का निष्कर्ष था कि आम लोगों से संबंधित सरकारी कार्यों को नियत समयावधि में पूरा किए जाने हेतु सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 में प्रावधान किए गए हैं और सेवा का अधिकार आयोग भी शिकायतों के आधार पर दंडात्मक कार्रवाई कर रहा है। फिर भी ये नाकाफी हैं। सरकारी दफ्तरों में इन प्रावधानों का खौफ नहीं है इसके लिए सभी दफ्तरों के बाहर संबंधित विभागो द्वारा आयोग द्वारा निर्धारित अवधि से संबंधित सूचनापट लगाये जाने जरूरी है। इससे अधिकारियों कर्मचारियों पर मनोवैज्ञानिक असर पैदा होगा। वक्ताओं ने कहा नैतिक मूल्यों में भारी गिरावट, भौतिक विलासिता,ऐशो आराम की आदत,शराबखोरी,झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा, धन कुबेर की आकांक्षाएं भ्रष्टाचार की जननी हैं। चरित्र में राष्ट्र प्रेम तथा आमजन की सेवा की भावना जैसी मानवीय संवेदनाओं का लोक सेवकों में अभाव है। लचीली प्रशानिक तथा कानून व्यवस्था,समाज में भय व आक्रोश आमजन की चिंता का कारण है। इस प्रवृति को बदलना होगा।वक्ताओं का कथन था की हमारी राजनीतिक,धार्मिक,आर्थिक, प्रशासनिक सभी व्यवस्थाएं इन दुष्प्रभावो से ग्रसित हैं।सामाजिक संस्थाओं का दायित्व है की वे इनके खिलाफ आवाज उठाएं क्योंकि चुप रहने से ऐसे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं।परंतु ईमानदार अधिकारियों कार्मिकों को प्रोत्साहित करना, पुरस्कृत करना भी साथ साथ जरूरी है।

इस अवसर पर राज्य के प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ज्वलंत विषयों तथा भ्रष्टाचार के मामलों को प्रमुखता से उठाने के प्रयासों की सराहना की गई। जागरूक नागरिकों ने वरिष्ट पुलिस अधीक्षक अजय सिंह तथा जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल द्वारा वरिष्ठ नागरिकों सहित आम नागरिकों के हितार्थ किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा भी की।

अंत में नशाखोरी तथा मिलावटखोरी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग के ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी, पुलिस उपाधीक्षक नीरज सेमवाल को शाल उड़ाकर सम्मानित भी किया गया।संवाद में आरपी सिंह,शांति प्रसाद नौटियाल,अवधेश शर्मा, रजनीश मित्तल, चौधरी ओमवीर सिंह, दीपचंद शर्मा, जीएस जैसल,

ब्रिगेडियर केजी बहल,डॉ. एसएल गुप्ता, विशंभर नाथ बजाज, दीपक शर्मा,एल आर कोठियाल, वीरेंद्र सिंह नेगी, दिनेश भंडारी, सुशील त्यागी, डॉ मुकुल शर्मा, मुकेश नारायण शर्मा, जितेंद्र डडोना,ठाकुर शेर सिंह, वीरेंद्र सिंह नेगी, कर्नल पदम सिंह थापा,खुशबीर सिंह, प्रमोद सैनी, नरेश चंद्र कुलाश्री, उपेंद्र बिजलवान, भगवती प्रसाद भट्ट, महेश भूषण, प्रदीप कुकरेती, जगदीश बावला आदि थे।

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