देहरादून
वीर शहीद केसरी चंद के 105 वें जन्मोत्सव के अवसर पर वीर शहीद केसरी चंद युवा समिति के तत्वावधान में देहरादून स्थित गांधी पार्क में अमर शहीद केसरी चंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद दुर्गा मल्ल की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया।
इस मौके पर गांधी पार्क में आयोजित श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक कार्यक्रम में विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल, भाजपा नेता प्रताप सिंह रावत, पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा, कालसी के ब्लॉक प्रमुख मठौर सिंह चौहान, युवा नेता बॉबी पंवार, जौनसार बावर कर्मचारी मंडल के अध्यक्ष रणवीर सिंह तोमर, पूर्व अध्यक्ष तुलसी तोमर, कर्मचारी मंडल के महासचिव वीरेंद्र सिंह तोमर, मोहन खत के स्याणा जयपाल सिंह चौहान, राजेश तोमर, भाजपा नेता गीताराम गौड, संजय तोमर, गजेंद्र जोशी, सुश्री विमला, प्रदीप वर्मा, शहीद केसरी चंद परिवार के विपिन शर्मा, राजेश शर्मा, दिनेश शर्मा, नवीन शर्मा, केसरी चंद युवा समिति के अध्यक्ष गंभीर सिंह, महासचिव मातवर सिंह, ध्वजवीर सिंह, कुंदन चौहान, प्रशांत नेगी, अमित पांडे, राजेश चौहान, जयवीर चौहान, सरदार सिंह, सतपाल चौहान, आदि सहित अनेक महानुभावों ने शहीद केसरी चन्द की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया।
बुधवार को उत्तराखंड के बलिदानी अमर शहीद केसरी चंद की जयंती है। वे वह बलिदानी हैं जिन्होंने आजाद हिंद फौज में शामिल हो कर ब्रिटिश हकूमत को चुनौती दी थी। 03 मई 1945 को महज 24 साल 6 माह की उम्र में अंग्रेजों द्वारा सूली पर लटका दिए गए थे।
जंग-ए-आजादी के वीर सिपाही शहीद केसरी चंद का जन्म 01 नवंबर 1920 को जौनसार बावर के क्यावा गांव में हुआ था। आरंभिक शिक्षा उन्होंने विकासनगर में ग्रहण की थी। बाद में उन्होंने डीएवी कॉलेज में आगे की पढ़ाई की।
बताया जाता है कि केसरी चंद बचपन से ही बहुत निडर और बहादुर थे और खेलों में उनकी खासी दिलचस्पी थी। जहां उनमें एक ओर नेतृत्व का गुण था, वहीं वह एक सच्चे देशभक्त भी थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी हमेशा अग्रणी भूमिका रही। 10 अप्रैल 1941 में वे रॉयल आर्मी सर्विस कोर में भर्ती हो गए। यह वह वक्त था जब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था। 29 अक्टूबर 1941 को केसरी चंद को मलाया में चल रहे युद्ध के दौरान मोर्चे पर तैनात किया गया था। इस दौरान उन्हें जापानी सेना ने बंदी बना लिया था।
बताते चलें कि केसरी चन्द नेताजी सुभाष चंद्र बोस से बेहद प्रभावित थे। यही कारण था कि वह आजाद हिंद सेना में भी शामिल हुए थे। अंग्रेजों से भिड़ंत के दौरान ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद वे दिल्ली कारागार में भेज दिए गए थे। इस दौरान ब्रिटिश राज्य के खिलाफ साजिश के आरोप में केसरी चंद को मोत की सजा दे दी गई।
3 मई 1945 को केवल 24 साल की उम्र में उत्तराखंड के इस वीर सेनानी को फांसी पर लटका दिया गया था। शहीद केसरी चंद के स्मृति में प्रत्येक वर्ष 3 मई रामताल गार्डन चकराता में एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जबकि कई वर्षों से देहरादून के शहीद केसरी चंद के जन्मोत्सव के अवसर पर गांधी पार्क देहरादून में उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाता है और दिन में खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन धूमधाम से संपन्न किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में जौनसार बावर के लोग एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहते हैं।


