देहरादून
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए कहा कि चिकित्सा का सम्मान वास्तव में भारत का सम्मान है। भारतीय परंपरा में प्राचीन काल में वैद्य कभी धन नहीं लेते थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां भिन्न हो गई हैं। आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर कार्य करने की अधिक आवश्यकता है।
रविवार को दून मेडिकल कालेज के प्रेक्षागृह में स्वामी विवेकानंद की 162 वीं जयंती पर स्वामी विवेकानन्द हेल्थ मिशन सोसाइटी के समारोह में स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर एक वृतचित्र प्रस्तुत करने के साथ ही सोसाइटी की 13 वर्षों के यात्रा का भी प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यक्रम में सोसाइटी के सेवा यात्रा की कॉफ़ी टेबल बुक व वार्षिक कैलेण्डर का विमोचन भी किया गया।
बतौर मुख्य अतिथि आरएसएस के
सह सरकार्यवाह आलोक कुमार ने सभी से चिकित्सा क्षेत्र में अहम योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि चिकित्सक ही स्वास्थ्य का आधार है और उनका सम्मान भारत का सम्मान है। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि मानव जीवन में यदि करुणा और उदारता न हो, तो वह जीवन अधूरा है। उन्होंने कहा कि जीवन की पहली कामना जिजीविषा होती है, अर्थात संघर्ष के बीच भी अस्तित्व को बनाए रखना।
उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग वेलनेस और ब्यूटी पर तो खर्च कर रहे हैं, लेकिन करुणा और मानवीय मूल्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन और परंपराओं का योगदान विश्वभर में फैला हुआ है।
बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष अशोक कुमार विंडलास ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में सोसाइटी के 10 कर्मठ योद्धाओं को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी उपस्थित रहे। इस मौके पर प्रांत प्रचारक डॉ शैलेन्द्र, प्रचार प्रमुख संजय, श्याम बागड़ी समेत अनेक लोग मौजूद थे।