देहरादून
रफैल राईडर चैशायर सेन्टर का 66वां स्थापना दिवस सास्कृतिक कार्यक्रमों के साथ धूमधाम से मनाया गया।
डालनवाला के मोहिनी रोड स्थित रफैल राईडर चैशायर सेन्टर की स्थापना सन् 1959 में ग्रुप कैप्टन लियोनार्ड चैशायर और बैरोनेस सू राइडर ने पीड़ितों की सहायता के उद्देश्य से की। 1959 में जब रफैल में कुष्ठ रोग से ठीक हुये लोगों को रखने के लिये टेंट में काम करना शुरू किया था, वही क्रम आज 2025 में भी लोगों की देखभाल करना जारी है राइफल सेंटर का ध्यान विकलांगता और स्वास्थ पर केंद्रित है।
रफैल बौद्धिक और विकासात्मक विकलांगता वाले बच्चों और युवा
व्यस्कों के लिये आवासीय देखभाल, प्रारंभिक हस्तक्षेप और सेवायें, व्यवसायिक प्रशिक्षण, मोबाइल आउटरीच कार्यक्रम जो उत्तराखंड राज्य को कवर करते हैं और एक शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रं भी प्रदान कर रहा है।
शनिवार को स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा जैसे विषय पर बच्चों ने नाटक, माइम व नृत्य द्वारा बताने का प्रयास किया गया कि किस तरह वातावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है।
कार्यकम में उत्तराखण्ड के सुप्रसिद्ध पर्यावरण का संदेश देने वाली महिला गौरा देवी द्वारा चलाए गए चिपको आदोंलन का भी वर्णन किया गया। नृत्य एंव स्किट द्वारा समझाया गया कि किस तरह मनुष्य अपनी सुविधा के लिये पर्यावरण दूषित कर रहा है व इसकी रोकथाम क्यों आवश्यक है जिसके लिये रफैल ने विभिन्न स्कुली छात्रों व अतिथियों को पौधे बांटे और उनकी देखभाल करने का आग्रह किया।
स्थापना दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे समाजसेवी और कम्युनिटी लीडर अनूप नौटियाल ने कहा कि किस तरह प्लास्टिक हमारी दैनिक दिनचर्या में महत्वपूर्ण होता जा रहा है जो कि सही नहीं है। इसको रोकने के प्रयासों को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
रफैल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रियो लाल ने सभी का धन्यवाद करते हुये कहा कि वातावरण को स्वच्छ रखने में सभी के सहयोग की आवश्यकता है।
इस अवसर पर रफेल सेंटर के सभी अध्यापकगणों के साथ सभी कर्मचारी भी मौजूद रहे।
