स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों को लेकर दून पुस्तकालय में बच्चों को सरल तरीकों से रंग बनाने की दी जानकारी,एक दूसरे को रंग भी लगा लिया आनंद

देहरादून

दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग से होली के प्राकृतिक रंगों को बनाने पर बच्चों को सामान्य जानकारी दी गयी। इसमें होली के दौरान सुरक्षित व प्राकृतिक रंगों के उपयोग के लाभ और रासायनिक रंगों के खतरों के बारे में बच्चों को जागरूक किया गया। इस अवसर पर हिमज्योति स्कूल के बच्चों ने कुछ सुंदर होली गीत भी प्रस्तुत किये।

‘स्पेक्स’ संस्था के रामतीरथ मौर्य ने बताया कि होली के दौरान बाजार में अधिकतर चमकीले रंग आते हैं, जो कई तरह के रसायनों से बनते हैं और स्वास्थ्य की दृष्टि से खतरनाक माने जाते हैं.इन रंगों से परहेज, प्राकृतिक रंगों के उपयोग तथा सामजिक जागरूकता पैदा करना इस जानकारी का मुख्य उद्देश्य है.आज की इस जानकारी के जरिये उपस्थित बच्चों ने सब्जियों , फलों और फूलों द्वारा स्वयं रंग बनाने कि विधि के साथ प्राकृतिक होली कैसे मनाये उसके बारे में सहज से जानकारी प्राप्त की।

जानकारी में स्पैक्स संस्था के प्रतिनिधियों वे आसान तरीकों से प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की सलाह दी व कहा कि प्राकृतिक रंग का उपयोग स्वास्थ्य कि दृष्टि से आसान व अच्छा उपाय है। उन्होंने इस विविध रंग बनाने की सरल विधियों को साझा किया गया।

बच्चों को सलाह दी कि बाजार के कई रंगों में मिले रसायन, त्वचा रोग, आंखों में जलन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा कर सकते हैं। सुरक्षित होली मनाने के उपायों को अपनाने कि अपील करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे होली खेलते समय शरीर पर नारियल का तेल या क्रीम अवश्य लगाएं,बालों में तेल लगाकार, फुल शर्ट और पैंट पहनें, धूपचश्मे का प्रयोग करें। रंग छुड़ाने के लिए हल्के गर्म पानी का प्रयोग करें।यदि कोई रंग न छूटे तो दही और बेसन का लेप लगाएं।

कार्यक्रम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के बाल प्रखंड की मेघा एन विल्सन, पुस्तकालयाध्यक्ष, डॉ. डी. के. पाण्डे, कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी,डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर सिंह बिष्ट, राकेश कुमार साहित आसरा ट्रस्ट, हिमज्योति स्कूल, प्रयास संस्था के 90 के करीब बच्चे, अभिभावक और अन्य लोग शामिल रहे।

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