विश्व रंगमंच दिवस पर विशेष लेख, देहरादून रंगमंच और महिला रंगकर्मी…डा.अतुल शर्मा

देहरादून
दून रंगमंच की महिला रंगकर्मी गम्भीर रंगमंच को आगे बढ़ाती रही हैं।
आज दूरदर्शन फिल्मों व चैनलों मे भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई है।
देहरादून की रंग संस्थाओं ने उन्हें मंच दिया और उन्होंने सभी की तरह स्तर दिया।
दून रंगमंच की शुरुआत तो रामलीला से ही माने। फिर बहुत लोगो के साथ साधू राम महेंद्रू ने बड़ा काम किया।
परिवर्तन हुआ एन एस डी के बंसी कौल की नाट्य कार्य शाला से। उससे पहले भी नाटक होते रहे।
गढ़वाल मे पहला नाटक संभवतः भवानी दत्त थपलियाल के जय विजय और हरिश्चन्द्र से मानी जा सकती है।
विषय है दून रंगमंच की अभिनेत्रियों का परिचय। हिमानी भट्ट शिवपुरी ने वातायन आदि संस्थाओ के साथ नाटक किये। ए एस डी किया। दूर दर्शन सीरियल मे देवकी भौजाई सभी को याद है। फिल्मो मे भी पहचान बनाई। मनोहर सिह आदि सभी के साथ कार्य किया।
एन एस डी से ही अमरदीप झा ने सीरियल ये रिश्ता क्या कहलाता है और फिल्म थ्री ईलियट मे छाप छोड़ी। श्रुति उल्फत ने धारावाहिक और फिल्मों मे विशेष स्थान बनाया है और अर्चना पूरन सिह आदि ने भी।
प्रतिभाशाली अभिनेत्री निवेदिता बौठियाल गढवाली फिल्म मेरी प्यारी ब्वै के साथ धारावाहिक एक कहानी कारावास रिपोर्टर साई बाबा आदि मे महत्वपूर्ण काम किया। सक्रिय है और देहरादून मे उन्होने शहीद खड्ग बहादुर पर केन्द्रित नाटक का लेखन निर्देशन किया। बहुत पहले देहरादून मे नाटक कथा एक कंस भी किया था।
अभिनेत्रियों मे उर्मिला कंडवाल कुसुम पंत सोनिया गैरोला जागृति, नीरा नंदा विमला ढौडियाल मिताली पुनेठा सुषमा बहुगुणा आदि।
एक ओर यशोधरा अधिकारी,रजनी अस्थाना,जागृति कुकरेती बहुत सक्रिय रही और भी बहुत सी महिला रंगकर्मी आज भी सक्रिय है।
पहले भी रही हैं।
आज के समय मे एमेच्योर थिएटर ग्रुप बहुत कठिनाई से चल पाते हैं पर पहले से कुछ ज्यादा दरवाजे खुले है।
आज गढ़वाल और दून जैसे विश्व विद्यालय मे विषय के रुप मे भी रंगमंच पढाया जा रहा है। अन्य विश्वविद्यालयों मे भी प्रतिभायें आ रही है। गढ़वाली कुमाऊँ जौनसारी फिल्मे भी योगदान दे रही है।

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