देहरादून/ऋषिकेश
परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, 2026 के चौथे दिन लगभग 80 देशों से 1500 से अधिक आए प्रतिभागियों और योग जिज्ञासुओं को आज भारत की प्राचीन विधा आयुर्वेद के विषय में विशेषज्ञों से गहन जानकारी प्राप्त हुई।
आज का दिन सूर्योदय ध्यान से लेकर सायंकालीन भक्तिमय संगीत तक अत्यंत उत्साह व दिव्यता से युक्त था। पारंपरिक योगिक अभ्यासों, दार्शनिक ज्ञान और समग्र उपचार का एक समृद्ध संगम था।
आज “विजडम टॉक्स” आध्यात्मिक संगोष्ठी के अन्तर्गत ’’आयुर्वेद- समग्रता का संतुलन, समन्वय और योगिक जीवन के माध्यम से स्वास्थ्य।” विषय पर विशेषज्ञों ने जानकारी प्रदान की।
इस सत्र में प्रतिष्ठित आचार्य और विशेषज्ञ डा रामकुमार, डॉ. कृष्णा पंकज नारम और मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने अपने विचार साझा किए, जिसका संचालन पौला तापिया ने किया। चर्चा में जानकारी दी कि आयुर्वेद किस प्रकार प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने और शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक कल्याण को विकसित करने का एक कालातीत दर्शन है।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आयुर्वेद सनातन संस्कृति की एक अमूल्य और जीवंत धरोहर है, जो हमारे जीवन को प्रकृति के साथ संतुलन में जीने की प्रेरणा देती है। ‘आयु’ अर्थात जीवन और ‘वेद’ अर्थात ज्ञान, इन दोनों का समन्वय ही आयुर्वेद है।
यह केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और जागरूक जीवन जीने की संपूर्ण जीवनशैली है। हमारे ऋषि-मुनियों ने गहन तप, अनुभव और प्रकृति के सूक्ष्म अवलोकन से इस विज्ञान को विकसित किया। आयुर्वेद हमें संदेश देता है कि शुद्ध आहार, संतुलित दिनचर्या, सकारात्मक विचार और प्रकृति के अनुरूप जीवन ही वास्तविक स्वास्थ्य और दीर्घायु का आधार हैं।
डा साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि वर्तमान समय में पूरे विश्व को योग व आयुर्वेद की सबसे अधिक आवश्यकता है। इस समय जब पूरा विश्व तनाव, असंतुलित जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों की चुनौती से जूझ रहा है, तब योग और आयुर्वेद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। योग शरीर, मन और आत्मा को संतुलन में लाकर आंतरिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है, वहीं आयुर्वेद प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए स्वस्थ और संतुलित जीवन का मार्ग दिखाता है। यह दोनों ही सनातन ज्ञान की अमूल्य देन हैं, जो केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को समग्र रूप से स्वस्थ, जागरूक और संतुलित बनाने की दिशा प्रदान करते हैं।
चौथे दिवस की सुबह माँ गंगा के पावन तट पर सूर्योदय के साथ ही साधकों ने योगाचार्य सुधांशु शर्मा के साथ सनराइज चैंटिंग का आनंद लिया, पूरा गंगा तट मंत्रोच्चार और भक्ति से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
योगाचार्य डॉ. इन्दु शर्मा द्वारा क्रिया योग तथा डॉ. रुचि गुलाटी द्वारा प्राणायाम तकनीकों का अभ्यास कराया गया, जिससे प्रतिभागियों ने श्वास और आंतरिक ऊर्जा के साथ गहरा संबंध अनुभव किया।
योगाचार्य साध्वी आभा सरस्वती जी ने योग निद्रा सत्र के माध्यम से गहन विश्राम और आंतरिक जागरूकता का अनुभव कराया। वहीं ब्रिटेन की प्रसिद्ध योग शिक्षिका जाह्नवी क्लेयर मिसिंगहैम ने विन्यास अभ्यास ‘‘इनवोक द गॉडेस’’ सत्र का संचालन किया, जिसमें प्रतिभागियों को शक्ति, सौम्यता और दिव्य शक्ति ऊर्जा को अनुभव करने का अवसर मिला।
योगाचार्य किया मिलर ने चक्र इंटेलिजेंस क्रिया एवं ध्यान सत्र के माध्यम से शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा प्रणालियों की जानकारी प्रदान की, योगाचार्य केटी बी हैप्पी ने रेवरेंस फ्लो सत्र के माध्यम से पाँचवें और छठे चक्र के संतुलन पर आधारित विन्यास अभ्यास कराया।
तत्पश्चात पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में सभी प्रतिभागियों ने सम्पूर्ण विश्व में शांति, स्वास्थ्य और सामंजस्य की प्रार्थनाओं के साथ यज्ञ किया।
योगाचार्य पाउला तापिया ने कहा कि योग और आयुर्वेद दोनों ही जीवन में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करने के मार्ग हैं।
मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने आयुर्वेद में स्वस्थ शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि इसका वास्तविक अर्थ है अपने भीतर स्थापित होना, अर्थात अपनी वास्तविक प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीना ही आयुर्वेद युक्त जीवन है।
डॉ. कृष्णा पंकज नरम ने कहा कि आज की तेज गति वाली दुनिया में संतुलन बनाए रखने के लिए हमें योगिक सिद्धांतों को जीवन में अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
दिन भर आयोजित विभिन्न सत्रों में योग दर्शन, ऊर्जा विज्ञान और आंतरिक परिवर्तन के विषयों पर गहन चर्चा हुई।
सियाना शर्मन ने चक्र रेडिएंस सत्र में सात चक्रों के ज्ञान को साझा किया। टॉमी रोसेना ने कुंडलिनी एम्बॉडिमेंट स्ट्रेंथ एंड ग्रेस सत्र का संचालन किया।
योगाचार्य जय हरि सिंह ने क्षमा और आत्म-जागरूकता की प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया, डॉ. एन. गणेश राव ने पतंजलि योगसूत्रों की कालजयी शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। आचार्य आशीष गिलहोत्रा ने नाड़ी योग के माध्यम से डिजिटल डिटॉक्स विषय पर सत्र लिया और योगाचार्य आनंद मेहरोत्रा ने मुक्ति के मार्ग के रूप में श्वास विषय पर प्रेरक विचार साझा किये।
दोपहर के सत्रों में आयुर्वेद, उपचार और दीर्घायु पर केंद्रित कार्यशालाएँ आयोजित हुईं। पाउला तापिया ने शामैनिक फ्लो सत्र का संचालन किया, जबकि एरिका कॉफमैन ने सेक्रेड साउंड हीलिंग के साथ ध्यान और मूवमेंट का अनुभव कराया।
मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने दैनिक जीवन के लिए आयुर्वेदिक जीवनशैली विषय पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. संजय मंचन्दा ने मस्तिष्क स्वास्थ्य और समाधि की अवस्थाओं के संबंध पर चर्चा की। डॉ. ए. वी. राजू, डॉ. पद्मा नायनी गधिराजू और डॉ. ईडन गोल्डमैन ने स्वस्थ जीवनशैली, नींद और दीर्घायु पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
डॉ. कृष्णा पंकज नरम ने मर्म शक्ति के प्राचीन रहस्य के माध्यम से शरीर के महत्वपूर्ण ऊर्जा बिंदुओं की उपचारात्मक शक्ति को समझाया।
गुरुवार की सांयकालीग परमार्थ निकेतन की विश्वविख्यात दिव्य गंगा आरती के पश्चात भारत का पहला जैमिंग बैंड, ऊर्जावान भाई-बहन की जोड़ी राघव और प्राची, बैकस्टेज सिब्लिंग्स का मंत्रमुग्ध करने वाले संगीत की स्वर लहरियों में योगी झूमने लगे।
मुंबई से आई प्रतिभागी मित्तल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, यह मेरा परमार्थ निकेतन आने का पहला अवसर है। यहाँ आकर नए लोगों से मिलना, आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करना, माँ गंगा के साथ जुड़ना और गंगा आरती का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत विशेष अनुभव है।”

