खलंगा में रिजर्व फॉरेस्ट की 40 बीघा जमीन पर कैंपिंग साइट बनाने के लिए तारबाड़ गेट लगाने को लेकर विरोध में उतरे प्रकृति प्रेमी – Latest News Today, Breaking News, Uttarakhand News in Hindi

खलंगा में रिजर्व फॉरेस्ट की 40 बीघा जमीन पर कैंपिंग साइट बनाने के लिए तारबाड़ गेट लगाने को लेकर विरोध में उतरे प्रकृति प्रेमी

देहरादून

ग्रीन दून आखिर किसको पसंद नहीं है लेकिन जहा गलत कामों को देखकर आंखे मूंदने वालों की कमी नहीं है वहीं खामियों को देख विरोध करने वालौं की भी कमी नहीं है।

ऐसे ही एक युवा दंपत्ति हैं रोहित वर्मा और उसकी पत्नि दीपशिखा जो अपने रायपुर विधानसभा के ओली गांव स्थित अपने आवास से रोज खलंगा मॉर्निंग वॉक करने आते हैं। और लोगों के साथ ये लोग भी कुछ नई गतिविधियां देख रहे थे। लेकिन शुक्रवार की सुबह इन्होंने वहां तार बाढ़ और लोहे का गेट लगाए देखा तो काफी आश्चर्यचकित हो गए। पूछने पर पता चला कि यहां तो लगभग 40-50 बीघे रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध कब्जा किया जा रहा है।

इन्होंने जागरूक नागरिक होने का परिचय देते हुए तत्काल क्षेत्र के डीएफओ को कॉल लगाई जो रिसीव नहीं हुई। तो बस एक छोटी सी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट के दी। रोहित पहले से ही मीडिया में रहे हैं कई सालों तक उन्होंने अखबारों की दुनिया में काम किया है। अब कनेक्ट न्यूज के नाम से दोनों पति पत्नी मीडिया से जुड़े हुए हैं।

बस फिर क्या था शुक्रवार से तो उस पोस्ट को देखने के बाद प्रकृति प्रेमियों में रोष फैल गया और शनिवार की सुबह बहुत सारे संगठनों के जागरूक सदस्य भी वहां पहुंच गए। प्रशासन फॉरेस्ट कर्मी भी दिखे। बस फिर तो अवैध रूप से लगे गेट तर बाढ़ सब हटा दिया गया। लोगों ने प्रशासन सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। वन कर्मियों ने बताया के मौके पर 40 बीघे के आसपास भूमि को तार बाढ़ से घेरा गया है, झाड़ियां और छोटे पेड़ों को साफ किया गया है।

हालांकि इससे पहले भी यहां सोंग बांध परियोजना में प्रस्तावित 2000 पेड़ों के कटान का विरोध सामने हुआ था और आज का दिन भू माफिया द्वारा 40 बीघा रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में कैंपिंग साइट के नाम थी। पर्यावरण संरक्षण प्रेमियों द्वारा इस रिजर्व फॉरेस्ट में 12 साल पहले भूमि का खरीदा जाना, लीज पर दिया जाना संदिग्ध बताकर जांच की मांग की गई।

सिटीजन फॉर ग्रीन दून, संयुक्त नागरिक संगठन की मांग पर उच्च अधिकारियों के निर्देश के अंतर्गत यहां डीएफओ अमित कंवर रेंज अधिकारियों के साथ यहां पहुंचे। राजस्व विभाग के अधिकारी भी साथ थे। इनके द्वारा अभिलेखों का मौके पर अध्ययन किया गया। परंतु इसे गहन जांच का विषय बताते हुए शीघ्र विस्तृत जांच कराने का फैसला लिया गया। क्षुब्ध नागरिकों का कहना था कि जब विवादित क्षेत्र के चारों ओर रिजर्व फॉरेस्ट हैं तो इसके बीच की भूमि कैसे निजी भूमि हो सकती है। इनके अनुसार खालऺगा वन में वृक्षों का कटान किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यहां बलभद्र खलऺगा विकास समिति,सिटिजन फॉर ग्रीन दून ,संयुक्त नागरिक संगठन, नेचर बड्डी, श्री दुर्गा सोशल वेलफेयर सोसाइटी, भूतपूर्व सैनिक संगठनों के जागरूक लोग शामिल थे।

इनमें जया सिंह,ईरा चौहान,आशीष गर्ग, अवधेश शर्मा,प्रद्युमन सिंह, पंकज उनियाल,परमजीत सिंह कक्कड़,कैप्टन वाई बी थापा, कैप्टन विक्रम सिंह थापा, नंदिनी शर्मा,मनीषा रतूड़ी,दीपशिखा रावत, वाई एस नेगी,मनीष मित्तल,टीटू त्यागी, मेजर एमएस रावत,परमेंद्र सिंह,रोहित वर्मा,दीपशिखा,जितेंद्र अन्थवाल, ,एस एस गोसाई, रविंद्र सिंह गोसाई, सागर नौटियाल, रोशन सिंह,यशवीर आर्य, नीरा रावत,अंकित रोथाण,यशवीर आर्य,श्रद्धा चौहान,युद्ध वीर गोसाई,इंद्रेश नौटियाल, आभा भटनागर,मनीष,महेश असवाल,जनसंवाद,रविंद्र गोसाई आदि शामिल रहे।

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