देहरादून/हल्द्वानी
विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में नैनीताल जिले से मीटर और बिलों से जुड़ी शिकायतें लगातार मिल रही हैं। जिसमें कम खपत होने के बावजूद अधिक बिल आने के मामले सर्वाधिक हैं।
वहीं, स्मार्ट मीटर लगाने में लापरवाही और गलत रीडिंग दर्ज होने से जुड़ी शिकायतों की भी भरमार है। बिजली की कोर्ट में सुनवाई के बाद 90 प्रतिशत मामलों में ऊर्जा निगम की गलती सामने आई है। जिस पर फोरम ने शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाए हैं। साथ ही निगम को राहत देने के निर्देश दिए हैं।
फोरम की रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हुई है।
सदस्य न्यायिक बिष्णु प्रसाद डोभाल, सदस्य तकनीकी तिलक राज भाटिया और सदस्य उपभोक्ता हिमांशु बहुगुणा की कोर्ट में मामलों की सुनाई हुई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में 223 नए मामले दर्ज हुए। जबकि, कोर्ट ने कुल 239 शिकायतों का निस्तारण किया। जिसमें 211 निर्णय उपभोक्ताओं के पक्ष में हुए। 28 पर ऊर्जा निगम को राहत मिली। वहीं, कुल निस्तारित मामलों में 164 बिल और मीटर से संबंधित थे। इसमें से 145 में कोर्ट ने निगम की खामी पाई और उपभोक्ता को राहत की बात की है।
चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में 50 नई शिकायतें आईं और पिछले प्रकरणों को मिलाकर कुल 59 का निस्तारण हुआ। इसमें 49 मामले मीटर और बिलों से जुड़े हुए ही थे। जिनमें से 42 में फैसला उपभोक्ता के पक्ष में आया।
इधर, फोरम ने अधिकांश मामलों का निस्तारण 60 दिन से भी कम समय में किया। लेकिन यह स्थिति दर्शाती है कि उपभोक्ता किस तरह समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उचित समाधान नहीं होने पर उन्हें कोर्ट की शरण लेनी पड़ रही है।
👉केस 1.
इंद्रानगर रानीबाग निवासी मोहन सिंह थार ने नौ सितंबर को फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने अप्रैल में 1423 यूनिट और मई में 1188 यूनिट के हिसाब से 17603 रुपये बिल प्राप्त होने की बात कही थी। तीन सदस्यीय कोर्ट में सुनवाई का दौर चला और 24 अक्टूबर को अंतिम निर्णय लिया गया। जिसमें तमाम जांचों से प्रमाणों के आधार पर अप्रैल और मई में 210 यूनिट प्रति बिल चक्र के आधार पर बिल संशोधित करने के आदेश ऊर्जा निगम को दिए गए। साथ ही उपभोक्ता से विलंब शुल्क और अधिभार नहीं लेने को कहा गया।
👉केस 2.
मां कालिका कालोनी निवासी आनंद सिंह परिहार ने बिजली शिकायत फोरम में सोलर प्लांट से संबंधित शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें अप्रैल से अगस्त तक मीटर में उत्पादन शून्य दर्शाने और धनराशि प्राप्त नहीं होने की जानकारी दी। फोरम के आदेश पर हुई जांच में स्मार्ट मीटर लगाने का जिम्मा संभाल रही कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई। गलत मीटर लगाने की वजह से सोलर की रीडिंग नहीं आने का मामला उजागर हुआ। कोर्ट ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए उनके नुकसान की भरपाई संबंधित कंपनी से करवाई।