हलाला पीड़िता की हिम्मत को सलाम,न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम, हम प्रयास करेंगे कि वक्फ बोर्ड कानूनी लड़ाई का समस्त व्यय और जीवन यापन का भार वहन करे… खजान दास – Latest News Today, Breaking News, Uttarakhand News in Hindi

हलाला पीड़िता की हिम्मत को सलाम,न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम, हम प्रयास करेंगे कि वक्फ बोर्ड कानूनी लड़ाई का समस्त व्यय और जीवन यापन का भार वहन करे… खजान दास

देहरादून

हरिद्वार जिले के बुग्गावाला थाना क्षेत्र के ग्राम बंदरजूद निवासी उस साहसी बहन को, जिसने हलाला और तीन तलाक जैसी अमानवीय कुप्रथाओं के विरुद्ध निडर होकर आवाज़ उठाई, मैं उनके अदम्य साहस और हिम्मत को हृदय से सलाम करता हूँ।

इस बहन का यह साहसिक कदम न केवल उन्हें व्यक्तिगत न्याय दिलाने में सहायक होगा, अपितु यह एक ऐसी मिसाल कायम करेगा जो भविष्य में हमारे मुस्लिम समाज की किसी भी बहन-बेटी के शोषण पर प्रभावी रोक का काम करेगी।

पीड़िता की पारिवारिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए मैं उत्तराखंड वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने अनुरोध किया कि इस बहन की क़ानूनी लड़ाई में आने वाले समस्त व्यय तथा उनके जीवन-यापन का भार वक़्फ़ बोर्ड वहन करे। यह इसलिए आवश्यक है ताकि आर्थिक अभाव के कारण न्याय की राह में कोई बाधा उत्पन्न न हो और आरोपी किसी भी प्रकार की कमज़ोरी का लाभ उठाकर बच निकलने का अवसर न पा सकें। इसके अतिरिक्त पीड़िता एवं उनके भाई सलमान की व्यक्तिगत सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने हेतु अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री द्वारा एसएसपी हरिद्वार को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर कोई कोताही अथवा लापरवाही न बरती जाए।

उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने इस प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “हरिद्वार के बुग्गावाला थाना क्षेत्र की इस बहन ने जो साहस दिखाया है, वह पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में लागू की गई समान नागरिक संहिता आज धरातल पर अपना प्रभाव दिखा रही है। यह प्रकरण इस बात का प्रमाण है कि UCC केवल एक कानून नहीं, बल्कि हर पीड़ित महिला के लिए न्याय का एक मज़बूत कवच है।

मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि हलाला, तीन तलाक और इस प्रकार की समस्त कुप्रथाएँ हमारे मुस्लिम समाज की बहन-बेटियों के साथ अन्याय हैं और इन्हें धर्म की आड़ में कदापि उचित नहीं ठहराया जा सकता। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग इस पीड़िता के साथ पूरी तरह खड़ा है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें शीघ्र एवं पूर्ण न्याय मिले।”

उत्तराखंड की धरती पर समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने के बाद यह प्रकरण इस बात का जीवंत प्रमाण है कि क़ानून अब केवल दस्तावेज़ों में नहीं, बल्कि धरातल पर हर पीड़ित महिला के साथ खड़ा है। राज्य में विवाह पंजीकरण प्रतिदिन 67 से बढ़कर 1,400 तक पहुँचना इस बात का प्रमाण है कि महिलाएँ अब कानून पर भरोसा कर रही हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं।

यह सरकार प्रतिबद्ध है कि प्रदेश की कोई भी माँ, बहन या बेटी अन्याय सहने को विवश न हो।

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