देहरादून
आज दिनांक 15-जून कों शहर में उगते कंक्रीट के जंगल,घटती हरियाली,प्रदूषण से चिंतित संयुक्त नागरिक संगठन का एक शिष्टमंडल मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी तथा सचिव मोहन सिंह बनिया से मिला। प्रतिनिधियों ने शहर में ट्रैफिक जाम की बढ़ती समस्याओं के निराकरण के लिए तत्काल योजनाएं बनाने की भी मांग की।प्राधिकरण अधिकारियों द्वारा बताया गया की दून के भावी मास्टर प्लान 2041 में शहर के नागरिकों को असुविधाएं न हो इसलिए नए एलिवेटेड रोड,फ्लाईओवर, एक्सप्रेसवे आदि का निर्माण प्रस्तावित है।प्रतिनिधियों ने शहर की सभी सड़कों के ऊपर चारों ओर एलिवेटेड रोड बनाकर इन्हें आपस में कनेक्ट करना ही ट्रैफिक जाम से मुक्ति का एकमात्र उपाय बताया। उपाध्यक्ष तिवारी ने बताया की पर्यावरण संरक्षण तथा भूजल के स्तर को बढ़ाने के लिए ग्रुप हाउसिंग सोसायटीज,औद्योगिक क्षेत्रों,शिक्षण संस्थानों में योजनाएं बनाई गई हैं। 400 स्क्वायर मीटर के प्लाट में फ्रंट लॉन का 10% भाग ग्रीन एरिया रखे जाने,125 स्क्वायर मीटर से अधिक क्षेत्र के आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को आवश्यक बनाया गया है। सरकारी स्कूलों में प्राधिकरण के सहयोग से वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।संगठन प्रतिनिधियों ने कहा आढ़त बाजार को जनहित में तत्काल शिफ्ट किया जाए जिससे नागरिकों को जाम से मुक्ति मिले,इस पर अधिकारियों ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। संगठन द्वारा औपचारिक रूप से सौंप गए ज्ञापन में बताया गया की 1984 में स्थापित प्राधिकरण का उद्देश्य दून शहर को सुनियोजित विकास की दिशा देना था।इसमें अवैध निर्माण पर रोक, सीलिंग सहित आवास और टाउनशिप का विकास, कृषि भूमि को आवासीय में बदलने तथा व्यावसायिक उपयोग में लाने की अनुमति के प्राविधान शामिल थे।सार्वजनिक पार्को और सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव भी इसका एक अंग था जिससे नागरिकों को रहने योग्य हराभरा वातावरण मिल सके।प्राधिकरण तथा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग उत्तराखंड द्वारा एमडीडीए द्वारा विचलित 2005- 2025 देहरादून महायोजना 2008 में स्वीकृत हुई थी जिसके परिणाम में शहर में हरे भरे पेड़ों की जगह कंक्रीट के जंगल उग गए हैं। ऐसे अनियोजित विकास को रोकना जनहित में जरूरी है।मास्टर प्लान 2041 का उद्देश्य भी दून क्षेत्र में शहरी विकास को सभी प्रमुख सड़कों के किनारे केंद्रित करना, पर्यावरणीय कुप्रभावों की कम करना, सुव्यवस्थित पार्किंग, वन तथा पहाड़ी क्षेत्रों में इमारतों,बुनियादी ढांचों, सड़कों, पुलों, फ्लाई ओवरों का चौड़ीकरण, यातायात नियंत्रण आदि है। इसमें नई रिंग रोड, बाईपास, एलिवेटेड कॉरिडोर आदि भी प्रस्तावित हैं। लेकिन आम जन में अवधारणा है की प्राधिकरण की कई योजनाएं जनापेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही हैं। अनियोजित निर्माण,पर्यावरणीय क्षति एवं आधारभूत सेवाओं की कमी के कारण शहर “विकास”की जगह “विनाश” की ओर बढ़ रहा है। लिखे गए सुझावों में मास्टर प्लान को हिंदी में तैयार करने, ड्राफ्ट पर अंतिम निर्णय होने तक बड़े भूमि-उपयोग परिवर्तन की मंजूरी स्थगित रखे जाने, पर्यावरण-आधारित विकास नियंत्रण, रेनवाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य बनाने के साथ नालों/खालों के दोनों ओर 15 मीटर “नो-कंस्ट्रक्शन रिपेरियन बफर” MDDA बायलॉज़ में अधिसूचित किए जाने की मांग की गई है। वृक्ष कटान पर 1:10 क्षतिपूर्ति वनीकरण +3 वर्ष जीवित रखने की बैंक गारंटी अनिवार्य करने, जल एवं जल-निकास व्यवस्था हेतु निचले ढाल वाले क्षेत्रों को ऊपरी सीवर से न जोड़कर “Slope Drainage Plan” के अंतर्गत नालों के साथ नीचे की ओर ले जाने का भी सुझाव दिया गया है। इसके लिए UUSDA से समन्वय बनाने हेतु एमoओoयूo किया जाना उपयुक्त बताया गया है। इसके अतिरिक्त 200 वर्गमीटर से बड़े सभी भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग+ ग्रेवाटर रियूज़ प्राधिकरण से नक्शा पास की पूर्व-शर्त लागू करने की भी मांग की गई है। अन्य सुझावों में नई कॉलोनी लेआउट तभी स्वीकृत करने जब सड़क,नाला, 10% ओपन स्पेस पहले विकसित हो की अनिवार्यता पर जोर दिया गया है। संगठन ने विभिन्न कॉलोनियों में मानक साइनबोर्ड/स्ट्रीट नेम एक ही पैटर्न में प्राधिकरण द्वारा लगाने, इसकी लागत कॉलोनी वेलफेयर से वसूली करने का भी सुझाव दिया है। मुख्य सुझाव के अंतर्गत सिटीज़न प्लानिंग बोर्ड” गठित करने, अवैध निर्माण हेतु “फास्ट ट्रैक सेल” गठित करने की भी मांग की गई है जो 45 दिन में ध्वस्तीकरण/नियमितीकरण का निर्णय दे सके। प्राधिकरण ने इन सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। शिष्टमंडल में गीरीशचंद्र भट्ट,मोहन सिंह खत्री, उमेश सक्सेना, देवेंद्र सिंह राणा, सुशील त्यागी, सत्य प्रकाश चौहान, ठाकुर शेर सिंह, अवधेश शर्मा, चंद्र किरण राणा शामिल थे।