देहरादून ऋषिकेश के बीच 4 लेन पर यात्रा अब सिर्फ तेज नहीं, बल्कि सुरक्षित और प्रकृति के अनुकूल भी होगी…NHAI – Latest News Today, Breaking News, Uttarakhand News in Hindi

देहरादून ऋषिकेश के बीच 4 लेन पर यात्रा अब सिर्फ तेज नहीं, बल्कि सुरक्षित और प्रकृति के अनुकूल भी होगी…NHAI

देहरादून

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पहाड़ों की तरफ से ऋषिकेश होते हुए एंट्री करने के लिए अब नए रोड को विकसित किया जा रहा है। जिसके लिए NHAI ने शुरुआत के दी है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI देहरादून के भानियावाला से जॉलीग्रांट होते हुए ऋषिकेश तक NH-07 पर लगभग 20 किलोमीटर लंबा फोर/सिक्स लेन राजमार्ग बनाने जा रहा है। 743 करोड़ की धनराशि से बनने वाली इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड में तैयार किया जा रहा है।

बताते चलें कि वर्तमान में यह दो-लेन मार्ग चारधाम यात्रा, पर्यटन और जॉलीग्रांट एयरपोर्ट की वजह से राज्य की लाइफलाइन बन चुका है।

एक जानकारी के अनुसार अभी रोजाना करीब 18,456 वाहन यानी 15,088 PCU इस रास्ते से गुजर रहे हैं।

सुरक्षा का मुद्दा:- घना जंगल, तीखे मोड़ और भारी वाहनों की आवाजाही से जाम और हादसे आम है।

भविष्य की तैयारी:- पर्यटकों और चारधाम यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 4- लेन से यात्रा का समय घटेगा, जाम कम होगा और सड़क की ज्यामिति सुधरने से सुरक्षा बढ़ेगी।

जंगल बचाने के लिए इंजीनियरिंग का कमाल:-

इस पूरे रूट में बड़कोट, ऋषिकेश और थानो जैसी संवेदनशील वन रेंज आती हैं। इसलिए NHAI ने डिजाइन में बड़े बदलाव भी किए गए हैं।

ROW में कटौती:- आमतौर पर नेशनल हाईवे के लिए 60 मीटर जमीन चाहिए होती है। यहां उसे घटाकर सिर्फ 23 मीटर रखा गया ताकि पेड़ों की कटाई न्यूनतम हो।

वृक्ष प्रतिरोपण:- FRI देहरादून के वैज्ञानिक सर्वे के बाद 754 पेड़ों को ट्रांसप्लांट के लिए चुना गया है। इन्हें इसी मानसून में नई जगह शिफ्ट किया जाएगा।

इको-फ्रेंडली तकनीक:- हर कदम पर यह ध्यान रखा गया कि विकास हो, लेकिन प्रकृति को नुकसान न पहुंचे।

हाथियों और वन्यजीवों के लिए ‘सुरक्षित गलियारा’:-

वन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले 5 साल में ऋषिकेश और बड़कोट रेंज में सड़क हादसों में 29 वन्यजीवों की मौत हुई। इसे रोकने के लिए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर की तर्ज पर खास प्रावधान किए गए हैं।

1 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास।

4 समर्पित एलीफेंट अंडरपास।

3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना ताकि हाथी बिना रुके नीचे से निकल सकें।

ग्रीन गाइड हेज: जानवरों को सही रास्ता दिखाने के लिए।

साउंड बैरियर और एंटी-ग्लेयर स्क्रीन: शोर और तेज लाइट से वन्यजीवों को बचाने के लिए

वाइल्डलाइफ वार्निंग साइन, स्पीड कैल्मिंग और नो हॉर्न जोन: मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए WWF-India

और भारतीय वन्यजीव संस्थान WII के विशेषज्ञों की सलाह से ये सभी उपाय शामिल किए गए हैं….

कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरी:-

परियोजना शुरू करने से पहले सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने WP PIL संख्या 37/2025 में स्पष्ट किया कि पेड़ कटाई पर कोई रोक नहीं है। इसके बाद राज्य सरकार ने पर्यावरणीय शर्तों के साथ वर्किंग परमिशन दी। NHAI का कहना है कि काम सभी नियमों का पालन करते हुए ही होगा।

उत्तराखंड को मिलेंगे ये बड़े फायदे:-

प्रोजेक्ट पूरा होते ही राज्य की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था दोनों को बूस्ट मिलेगा:

बेहतर कनेक्टिविटी: देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच सफर आसान और तेज।

पर्यटन को बढ़ावा: चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए सुगम यात्रा।

सुरक्षा: चौड़े कैरिजवे और बेहतर डिजाइन से दुर्घटनाएं कम होंगी।

भविष्य के लिए तैयार: आने वाले सालों में दूसरे हाईवे से आने वाले अतिरिक्त ट्रैफिक को भी यह सड़क संभाल सकेगी।

इको-बैलेंस: विकास के साथ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही भी सुनिश्चित होगी।

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