देहरादून
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) के दीक्षा समारोह में वर्ष 2024-26 पाठ्यक्रम के प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी पासआउट होकर अपने-अपने कैडर में सेवा देने के लिए तैयार हैं।
भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के कुल 109 युवा वनाधिकारी देश को मिले हैं, जबकि दो मित्र राष्ट्र भूटान के अधिकारी भी पासआउट हुए। सर्वाधिक 11 अधिकारी मध्य प्रदेश को मिले हैं, जबकि पांच अधिकारी उत्तराखंड की झोली में आए हैं। पाठ्यक्रम में महाराष्ट्र निवासी और राजस्थान कैडर की अधिकारी प्रतीक्षा नानासाहेब काले ने टॉप किया है।
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के सभागार में शनिवार को दीक्षांत समारोह का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया। उन्होंने सफल अधिकारियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए। युवा वनाधिकारियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा कर रहे अधिकारी विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का क्षरण और मरुस्थलीकरण जैसी चुनौतियां वन अधिकारियों के सामने होंगी। इनसे निपटने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी को समान महत्व देना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल आंकड़ों के विश्लेषण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने में भी होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से उच्च नैतिक मूल्यों, समय के प्रभावी उपयोग, त्याग, करुणा और नेतृत्व क्षमता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने कहा कि संस्थान, जो पहले इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज के नाम से जाना जाता था, वर्ष 1938 से देश की सेवा कर रहा है। अब तक स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों को यहां प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

