देहरादून/गोपेश्वर/दिल्ली
बदरीनाथ धाम के संगीत समारोह और डीजे कार्यक्रम को लेकर भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ.मुरली मनोहर जोशी द्वारा सोशल मीडिया पर आपत्ति जताई गयी है। उन्होंने इसे धाम की सांस्कृतिक मर्यादा और पवित्रता के विपरीत बताते हुए केंद्र व राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने का आग्रह किया है। जोशी ने कहा कि हिमालय की इस पवित्र भूमि को शोर-शराबे और बाजारू संस्कृति का केंद्र बनाने से धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मूल्यों को नुकसान पहुंच सकता है।
भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने फेसबुक में अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए केंद्र व राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
दूसरी तरफ
बदरीनाथ धाम में आयोजित देवभूमि टू कल्चरल फेस्टिवल-2026 को लेकर उक्रांद ने भी सोना विरोध दर्ज कराया है। आयोजन पर सोशल मीडिया में उठ रहे सवालों के बीच चमोली प्रशासन ने इसे लेकर प्रसारित पोस्ट को भ्रामक बताते हुए आयोजन को परंपरानुसार आयोजित कार्यक्रम बताया है। वहीं उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने कार्यक्रम को धाम की धार्मिक मर्यादाओं और परंपराओं के विपरीत बताते हुए देहरादून, गोपेश्वर और रुद्रप्रयाग में विरोध प्रदर्शन किया।
चमोली प्रशासन के अनुसार सेना की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बदरीनाथ स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और प्रतिभाओं को मंच देने के साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना था। सेना के अनुरोध पर प्रशासन ने विभिन्न जनोपयोगी स्टॉल भी लगाए थे।
वाइन, उक्रांद ने आयोजन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बदरीनाथ जैसे धार्मिक धाम में इस तरह के कार्यक्रम वहां की परंपराओं और मर्यादाओं के अनुरूप होने चाहिए। देहरादून में कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। केंद्रीय उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट ने आरोप लगाया कि आयोजन से धाम की मर्यादाओं को ठेस पहुंची है।
गोपेश्वर में उक्रांद केंद्रीय महामंत्री बृजमोहन सिंह सजवाण के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला फूंका। विवाद के बीच प्रशासन की सफाई और उक्रांद के विरोध ने बदरीनाथ धाम में होने वाले सांस्कृतिक आयोजनों की प्रकृति और मर्यादा को लेकर बहस तेज कर दी है।
विरोध स्वरूप भाजपाके वरिष्ठ नेता डॉ.मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा है कि
बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह (DJ concert) को अनुमति प्रदान करना ना केवल सांस्कृतिक मर्यादाओं का उन्लंघन है अपितु धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है। आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी उल्लेखनीय है कि इस स्थान पर शंख बजाना भी मना है परंतु हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे है साँथ में इतनी ऊचाई पर हजारों लोगो के नाचने से उनके स्वास्थ पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे है। यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृती के रूप में परिणीत किया जा रहा है।
मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायीयों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूँ कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाये, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूँगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाये रखें।
हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास माँ गंगा का उद्गम है इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ो भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है।

