देहरादून/पौड़ी गढ़वाल
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा दिल दहला देने वाली घटना पौड़ी गढ़वाल जिले से सामने आई है, जहाँ विकासखंड कोट क्षेत्र के अंतर्गत वाडियूं गांव में एक आदमखोर गुलदार ने 55 वर्षीय महिला को अपना निवाला बना लिया। इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया। हालांकि, घटना के बाद हरकत में आए वन विभाग और उनके विशेषज्ञ शूटर ने आदमखोर गुलदार को मार गिराया है, जिससे ग्रामीणों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाडियूं गांव की रहने वाली 55 वर्षीय प्रभा देवी मंगलवार को अपने घर के पास स्थित खेतों में मवेशियों के लिए घास काटने गई थीं। इसी दौरान खेतों की झाड़ियों में पहले से घात लगाए बैठे आदमखोर गुलदार ने उन पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। गुलदार का हमला इतना अप्रत्याशित और भीषण था कि महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
गुलदार महिला को अपने जबड़ों में दबोचकर करीब 400 मीटर दूर पहाड़ी पर स्थित एक सुनसान खंडहर की तरफ घसीट ले गया। इस दौरान गुलदार ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए महिला का सिर धड़ से अलग कर दिया। काफी देर तक जब प्रभा देवी घर वापस नहीं लौटीं, तो उनके पति मातबर सिंह चिंतित हो गए। वे अपनी पत्नी को ढूंढते हुए खेतों की ओर बढ़े। वहाँ का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। खेतों में प्रभा देवी के फटे हुए कपड़े और चारों तरफ खून के गहरे निशान बिखरे पड़े थे।
खेतों में खून के निशान देखने के बाद मातबर सिंह ने तुरंत शोर मचाया और गांव वालों को इस अनहोनी की सूचना दी। आनन-फानन में बड़ी संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडों के साथ इकट्ठा हुए और महिला की तलाश में जंगल व पहाड़ी की ओर दौड़े। खोजबीन के दौरान ग्रामीणों ने गांव के ऊपरी हिस्से में स्थित एक पुराने खंडहर में देखा कि गुलदार महिला के शव को बेरहमी से नोच रहा था।
ग्रामीणों ने एकजुट होकर भारी शोर मचाना और पत्थर फेंकना शुरू किया। ग्रामीणों का उग्र रूप देखकर गुलदार शव को छोड़कर घने जंगलों की तरफ भाग खड़ा हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और प्रभा देवी तड़प-तड़प कर दम तोड़ चुकी थीं। इस हृदयविदारक घटना से पूरे कोट क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के खिलाफ फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने आदमखोर को तुरंत मारने की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। आक्रोशित ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग की और आदमखोर गुलदार को तुरंत मारने या पकड़ने की शर्त पर अड़ गए। स्थिति को भांपते हुए वन विभाग ने अपने विशेषज्ञ और प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकिल को तैनात किया।
खंडहर के आसपास झाड़ियों में गुलदार के छिपे होने की पूरी आशंका थी, क्योंकि वह अपने शिकार को छोड़ना नहीं चाहता था। जैसे ही वन विभाग के कर्मचारी और शूटर सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, तभी अचानक आदमखोर गुलदार ने वन कर्मियों पर सीधा हमला बोल दिया। गुलदार को अपनी ओर झपटते देख, आत्मरक्षा और टीम की जान बचाने के लिए प्रसिद्ध शूटर जॉय हुकिल ने तुरंत ट्रिगर दबा दिया। जॉय हुकिल की गोली सीधे गुलदार को लगी और वह वहीं ढेर हो गया।
सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद शूटर जॉय हुकिल ने मीडिया को बताया कि गुलदार बेहद आक्रामक हो चुका था और उसने सीधे वन विभाग की टीम पर हमला किया था। ऐसी गंभीर स्थिति में आत्मरक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए गुलदार को शूट करना ही एकमात्र विकल्प बचा था। इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन वन्यजीवों का यह खौफ अब भी उनके दिलों में घर कर गया है।
गांव के स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में गुलदार का आतंक नया नहीं है। कुछ दिनों पहले भी गांव के पास एक मादा गुलदार को उसके दो शावकों के साथ देखा गया था। आए दिन गुलदार ग्रामीणों के पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहे थे। ग्रामीणों का कई बार गुलदार से आमना-सामना भी हुआ था, जिसकी शिकायत वन विभाग से की गई थी, परंतु समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में अभी भी अन्य गुलदारों की मौजूदगी की पूरी संभावना है। आदमखोर के खौफ के कारण बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो गया है और महिलाएं अकेले खेतों में जाने से कतरा रही हैं। ग्रामीणों ने उत्तराखंड सरकार और वन विभाग से मांग की है कि केवल एक गुलदार को मारने से समस्या का अंत नहीं होगा; आबादी वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों की एंट्री रोकने के लिए फेंसिंग, गश्त और ठोस नीति जैसे स्थायी कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान न जाए।