देहरादून
ग्राम संगठन की अध्यक्ष चंद्रकला,कोषाध्यक्ष कोमल मेघा
एवं सहसपुर ब्लॉक से आईपीआरपी नंदा नेगी वीरांगना कलस्टर के सहयोग से ग्राम पंचायत क्यार कुली भट्टा में कल्याणी ग्राम संगठन की महिलाओं ने स्वयं प्राकृतिक वस्तुओं के उपयोग से होली के ऑर्गेनिक रंग बनाना सीखा और अब इन रंगों को वृहद स्तर पर बनाकर महिलाओं को भी बनामैक लिए प्रेरित कर रही हैं।
संगठन की अध्यक्ष चंद्रकला नेक्सस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ऑर्गेनिक या प्राकृतिक रंगों में मुख्य रूप से फूलों, फलों, सब्जियों और जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया जाता है, जिन्हें कॉर्नस्टार्च, बेसन, चावल का आटा या आरारोट पाउडर के साथ मिलाकर गाढ़ा किया जाता है। इनके बेस (आधार) के लिए मैदा या टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल भी होता है और खुशबू के लिए गुलाब जल या एसेंस भी डाला जाता है।
ऑर्गेनिक रंगों में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सामग्री स्वीकार से है…
पीला रंग बनाने के लिए हल्दी पाउडर और बेसन या गेंदे के फूल,
लाल/गुलाबी के लिए चुकंदर (Beetroot) का रस या पाउडर, हिबिस्कस (गुड़हल) के फूल, और सूखे अनार के छिलके,हरा रंग के लिए सूखी पालक (Spinach), नीम की पत्तियां या धनिया।
नीला रंग के लिए इंडिगो (नील) के पौधे या जाकारंडा (Jacaranda) के फूल, नारंगी (Orange) रंग के लिए गेंदे के फूल या टेसू (Palash) के फूल और इसका बेस (Base) बनाने के लिए अरारोट पाउडर, मक्का का आटा (Cornflour), बेसन या मैदा का उपयोग किया जाता है।
इन प्राकृतिक सामग्रियों को सुखाकर, पीसकर और छानकर सुरक्षित गुलाल तैयार किया जा रहा है।
