देहरादून/गोपेश्वर
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के जवानों ने बॉर्डर की चौकसी के साथ ही वाइब्रेंट विलेज के गांवों के मवेशियों के स्वास्थ्य की देखभाल की तैयारी भी शुरू कर दी है। अब नीती और माणा घाटी में आईटीबीपी ही मवेशियों के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालेगी। आईटीबीपी और पशुपालन विभाग के बीच इसको लेकर एमओयू हुआ है। शनिवार को जिलाधिकारी गौरव कुमार ने पशुपालन विभाग के दवाईयों व उपकरणों से लेस वेटरनरी मेडिकेयर यूनिट वाहन को आईटीबीपी को सौंप दिया है।
वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत क्षेत्र के पशुपालकों के मवेशियों के बेहतर उपचार के लिए जिला प्रशासन ने यह नई पहल शुरू की है।
जिलाधिकारी ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांवों में विकास कार्यों के साथ ही अन्य सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है।
इसी क्रम में जिला प्रशासन की ओर से सीमांत क्षेत्र के पशुपालकों की सुविधा के लिए वेटरनरी मोबाइल वाहन शनिवार को उपलब्ध करा दिया गया है। जिसका संचालन आईटीबीपी के ओर से किया जाएगा। वहीं वाहन के संचालन के लिए दवाइयों व अन्य संसाधनों की आपूर्ति पशुपालन विभाग की ओर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि वाहन के सुचारु और नियमित संचालन के लिए पशुपालन विभाग और आईटीबीपी के मध्य अनुबंध किया गया है।
इस मौके पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी असीम देव, परियोजना निदेशक आनंद सिंह, आईटीबीपी गौचर के द्वितीय कमान अधिकारी डॉ गौतम कुमार पंकज आदि मौजूद थे।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी असीम देव ने बताया कि आईटीबीपी को दवाईयां व वाहन सुविधा पशुपालन विभाग की ओर से मुहैया कराया जाएगा और क्षेत्र में सेवाएं आईटीबीपी देगी।