हिमालय के निवासी उसकी पर्यावरणीय रक्षा करने में सक्षम है उनको प्रोत्साहन मिलना चाहिए..राज्यपाल बेबी रानी मोर्य

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देहरादून
राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने कहा कि हिमालय देश को अमूल्य पर्यावरणीय सेवाएं दे रहा है। हिमालय का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये। विकास और संरक्षण एकतरफा नहीं होना चाहिये, हिमालयवासी पर्यावरण और जल बचाकर पूरे देश की सेवा करते हैं इसीलिये इसके बदले में स्थानीय निवासियों की चिन्ता करनी होगी। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के संसाधनों को संरक्षित रखते हुए यहाँ की महिलाओं, किसानों, युवाओं की आजीविका और उनकी समृद्वि की राह निकालनी जरूरी है। राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मोर्य ने वन अनुसंधान संस्थान (FRI)में आयोजित ‘‘हिम संवाद’’ कार्यक्रम के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित किया। सेवा इन्टरनेशनल संस्था द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित ‘‘सत्त विकास लक्ष्यों’’ में हिमालयी दृष्टिकोण पर विचार मंथन हेतु यह दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।
राज्यपाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की प्रमुख भूमिका है। हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिमालयी क्षेत्रों में महिलाओं को कैसे परिवर्तन का वाहक बनाया जाय। यहाँ की महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एकजुट होकर अत्यंत प्रशंसनीय कार्य कर रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इस प्रकार के समूहों को अच्छा प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक मार्गदर्शन देकर उनके व्यापार और अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाय।
राज्यपाल मौर्य ने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल छोटे-छोटे उद्योग लगाकर युवाओं और ग्रामीणों को सशक्त बनाया जाना भी जरूरी है। होम स्टे योजना एक अच्छी पहल है। इससे जुड़कर लोगों को न सिर्फ प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ होगा बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उत्तराखण्ड के हस्त शिल्प एवं स्थानीय उत्पादों के लिये बाजार तैयार होगा। इसी प्रकार योग, आयुर्वेद, वेलनेस सेक्टर में युवाओं को प्रशिक्षित कर उनके लिए रोजगार सृजन किया जा सकता है। साहसिक पर्यटन के साथ ही हिमालयी समुदायों, सांस्कृतिक व सामाजिक पहलुओं को भी पर्यटन से जोड़ना होगा। जीरो बजट फार्मिंग और जैविक कृषि भी हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक अच्छी पहल है।
राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय जड़ी बूटियों के भण्डार हैं। स्थानीय जड़ी-बूटियों के उत्पादन को प्रोत्साहित कर स्थानीय आर्थिकी व स्थानीय समुदायों को भी मजबूती मिलेगी। नदियों और जल स्रोतों की स्वच्छता के प्रति एक अभियान चलाना होगा। जल संरक्षण के परम्परागत तरीकों को बनाए रखना आवश्यक है। हिमालयी क्षेत्रों में कूड़े के प्रबंधन व स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सेवा इन्टरनेशनल से राकेश मित्तल, आईआईपी से सहायक निदेशक अमर कुमार जैन, श्रीमती क्षमा मैत्रेयी, श्री एस एस कोठियाल, आर एस रावल, पूर्व मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डेय आदि उपस्थित थे।

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