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निजी अस्पताल की लापरवाही उजागर, समाज सेविका संध्या शर्मा की सक्रियता और सरकारी अस्पताल द्वारा कार्य के प्रति समर्पण से बची मरीज की जान

देहरादून/नैनीताल
नैनीताल के एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही और सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डेरा काम के प्रति समर्पण की भावना के चलते मरीज की जान बचाई जा सकी।
इस तरह के गंभीर मामले में वजय निजी चिकित्सालय पर आरोप लगाने लाजिमी हैं।
प्राप्त।जानकारी के अनुसार कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रहे कमलेश कुमार को निजी चिकित्सालय द्वारा समय पर उपचार न मिलने और इमरजेंसी में कथित रूप से डॉक्टर द्वारा देखने से इनकार किए जाने के बाद मरीज की हालत इतनी बिगड़ गई कि मरीज बेहोश हो गया। ऐसे कठिन समय में लंबे समय से समाज सेवा कर रही एडवोकेट संध्या शर्मा मरीज के लिए सहारा बनी और तुरंत मरीज को सरकारी अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू करवाया।
जानकारी के अनुसार कमलेश कुमार 24मई से लगातार उल्टी, लूज़ मोशन और चक्कर की समस्या से पीड़ित थे उनको 25 मई को निजी अस्पताल में दिखाया डॉक्टर ने कुछ टेस्ट लिखे और 26 मई को टेस्ट की रिपोर्ट्स के साथ ओपीडी में तथा ज्यादा हालत खराब होने पर उसी रात लगभग 3 बजे इमरजेंसी में भी दिखाया गया, लेकिन विशेष सुधार नजर नहीं आए।
कमलेश के परिजनों का आरोप है कि 28 मई को मरीज की हालत अत्यंत गंभीर होने पर उसे पुनः निजी चिकित्सालय बी.डी. पाण्डेय अस्पताल की इमरजेंसी में ले जाया गया, लेकिन इमरजेंसी में मौजूद डॉ. मोनिका कांडपाल ने मरीज को देखने तक से इनकार कर दिया। मामले की जानकारी फोन पर पीएमएस डॉ. तरुण टम्टा को भी दी गई, किंतु परिजनों के अनुसार वहां से भी कोई तत्काल सहायता नहीं मिल पाई।
समय पर उपचार न मिलने के कारण मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसी बीच समाज सेविका संध्या शर्मा आगे आईं और गंभीर अवस्था में मरीज को दोबारा सरकारी अस्पताल पहुंचाया। यदि समय रहते संध्या शर्मा हस्तक्षेप न करतीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।
दोपहर इमरजेंसी में तैनात डॉ. सुनील कुमार ने मरीज की गंभीर हालत देख तत्काल भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया। जिसके चलते मरीज की हालत में सुधार आया। समाज सेविका संध्या शर्मा और मरीज के परिजनों ने डॉ. सुनील कुमार की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में यदि हर डॉक्टर मरीज के प्रति इतनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाए, तो कई लोगों की जान बच सकती है।
वहीं दूसरी ओर, मरीज की गंभीर हालत में कथित लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार डॉक्टर और चिकित्सालय के खिलाफ क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सकों का सही निर्देशन और इलाज मिले तो मरीज को बार-बार भटकना न पड़े। बस जरूरत है मरीज को सही इलाज और माहौल मिलेगा तो निजी चिकित्सालयों में जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
यहां समाज सेविका संध्या शर्मा ने मानवता का परिचय दिया और एक असहाय मरीज की मदद कर इंसानियत की मिसाल पेश की है।
इससे पूर्व भी संध्या शर्मा असहाय लोगों की मदद करती रही हैं। इसीलिए क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं और उनकी एक अलग पहचान बनी है।

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