निर्मल मन ही कर सकता है सच्ची भक्ति ..माता सूदीक्षा

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निर्मल मन ही परमात्मा की भक्ति कर सकता है, अंग्रेजी भाषा का सहारा लेकर निरंकारी युवा संतों ने सत्गुरु माता सुदीक्षा सविन्दर हरदेव जी महाराज के आशीर्वाद एवं निरंकारी मिशन का पवित्र संदेश देते हुए जोनल स्तरीय इंग्लिश मीडियम समागम के माध्यम से जन-जन को आध्यात्म से जुड़ने की प्रेरणा दी।
बता दें कि इस समागम की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली से पधारे श्री अविनाश गर्ग जी ने संत निरंकारी सत्संग भवन, हरिद्वार बाईपास रोड के तत्वाधान में जोन मसूरी की कई ब्रांचों से पधारे प्रभु प्रेमियों के विशाल जनसमूह सम्बोधित करते हुए कहा कि जब तक हमारे जीवन में पूर्ण सत्गुरु नही आता तब तक हमें सत्य का पता नही चल पता। जब हमारे जीवन में पूर्ण सत्गुरु आ जाता है तो हमें सत्य का पता चल जाता हैं कि यह परम सत्ता पहले भी थी और आज भी है। यह जिसकी रचना है वह पहले भी था और आज भी है। जो बिना सत्संग के भक्ति संभव नहीं है जब तक सेवा, सत्संग, सिमरन सेवा में नही बदल जाता तब तक हमारी भक्ति संभव नही है।
भक्ति के मर्म पर प्रकाश डालते हुए आपने आगे कहा कि मिशन की शिक्षा को जीवन में उतारना और उसके अनुसार अपना जीवन जीना ही भक्ति है। सत्संग में आने से ही मन की मैल धुल सकती है। प्रेम के बिना भक्ति अधूरी है भक्ति किसी कर्म का नाम नहीं बल्कि अवगुणों को छोड़कर सत्गुरु द्वारा सिखलाए गुणों को जीवन में धारण करना ही भक्ति है।
उन्होंने कहा आज सद्गुरु माता जी की कृपा से हमारे विचार बदले है और हमारे आध्यात्मिक विचारों में भिन्नता आई है। हमें प्रेम नम्रता वाला जीवन मिला है। कार्यक्रम में सेवादल व संगत के भाई-बहनों ने अंग्रेजी भाषा में ही गीत, भजनों द्वारा गुरु की महिमा का वर्णन किया एवं संगतों ने आशीर्वाद प्राप्त किया।

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