देवभूमि का जवान राजेन्द्र नेगी इंडो पाक सीमा से लापता खोजबीन जारी..

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देहरादून
देहरादून के अंबीवाला स्थित सैनिक कॉलोनी निवासी हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी पाकिस्तान की सीमा से लापता
बीते नौ जनवरी को सुबह करीब 11 बजे गुलमर्ग में पाकिस्तान सीमा के पास पैदल पैट्रोलिंग के कर रहे थे। प्रैट्रोलिंग के दौरान हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी का बर्फ में पैर फिसल गया और वे रपटकर सीमा पार पाकिस्तान पहुंच गए। जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। सेना के अधिकारियों द्वारा जैसे ही जवान के लापता होने की सूचना मिली कारवाही शरू कर दी गयी है और लगातार बॉर्डर होने के बावजूद ढूंढ जारी है। परिजनों को सूचना मिलने के बाद तो परिवार के साथ उनके पैतृक गांव ओर देहरादून में माहौल गमगीन है। खबर सूनने के बाद से जहां देहरादून के अम्बिवाला क्षेत्र की सैनिक कॉलोनी में रह रही हवलदार राजेंद्र की पत्नी राजेश्वरी देवी और उनके तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं जवान के माता-पिता एवं स्वजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बता दें कि चार भाइयों में सबसे बड़े राजेंद्र के माता-पिता अपने अन्य तीन बच्चों के साथ पैतृक गांव पंजियाणा में ही रहते हैं। गांव में ही लापता जवान के पिता रतन सिंह नेगी की चाय की एक छोटी सी दुकान है। लापता जवान की दो बेटियां अंजलि और मीनाक्षी आठवीं और चौथी कक्षा में पढ़ती हैं जबकि उनका बेटा प्रियांश छठी कक्षा में है। पत्नी का कहना है कि लापता होने से एक दिन पहले आठ जनवरी को ही उन्होंने फोन पर अपने बच्चों और पत्नी से बात की थी।
यहाँ बताते चले कि काफी लोग असमंजस में है कि अभी तक ये पुख्ता जानकारी ही नही कि भारतीय सेना का जवान राजेन्द्र नेगी वास्तव में पाकिस्तान के कब्जे में है या नही।
परिजन चाहते हैं कि जैसे अभिनन्दन को पाकिस्तान से छुड़वाने के लिए पहल की गई थी कुछ ऐसी ही पहल राजेन्द्र के लिए भी की जानी चाहिए।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के साथ अन्य मंच भी आगे आ रहे है।मंच के नेता जगमोहन नेगी के साथ ही कोंग्रेस के युवा नेता संग्राम पुंडीर भी अम्बिवाला स्थित उनके उनके आवास पर परिजनों से मिले वो भी कहते है कि सरकार को अभिनन्दन की भांति ही कार्यवाही को आगे आना चाहिये।

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