उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी मंच का दो दिवसीय सम्मेलन यादों और वादों के साथ संपन्न,प्रदेश भर से जुटे आंदोलनकारी

देहरादून

सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रादेशिक सम्मेलन के दूसरें एवं अंतिम दिन प्रथम सत्र का शुभारम्भ मुख्य अतिथि कैबिनेट मन्त्री गणेश जोशी, अति विशिष्ट अतिथि बद्रीनाथ विधायक लखपत बूटोला एवं विशिष्ट अतिथि डा. महेश कुड़ीयाल , पूर्व सूचना आयुक्त योगेश भट्ट , जनकवि डा.अतुल शर्मा के साथ प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा व समाजसेवी सुनीता प्रकाश ने आंदोलनकारी मंच के पदाधिकारियों के साथ शहीदों के चित्रों पर पुष्प चढ़ाये एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

मंच की महिलाओं द्वारा माँगल गाकर सभी अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन राज्य आंदोलन के बाद कितना खरा उतरा अपना प्रदेश विषय पर चर्चा की गई।

कैबिनेट मन्त्री गणेश जोशी ने आंदोलन के दौर को याद करते हुये उत्तर प्रदेश पुलिस की जेल यातना के किस्से भी सुनायें। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को

जल्द सरकार से निस्तारण करने की बात कही साथ ही उन्होंने कहा कि हमें अपने प्रदेश के मूल विषयों को लेकर पक्ष विपक्ष को एक मत होना ही होगा और अपने पहाड़ पर सेवा निभानी होंगीं।

लखपत बूटोला ने कहा कि प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितयां हैं और आपदा व पलायन व रोजगार जेसे मूल विषय हैं इन पर राज्य आंदोलनकारी मंच लगातार उठाता हैं और मैं भी हमेशा इसके लियॆ प्रतिबद्ध हूं।

पूर्व सूचना आयुक्त ने कहा कि विकास में जो कमियां हुई उसमें राज्य आंदोलनकारियों को भी शिद्धत के साथ मूल विषयों को लेकर चर्चा करनी चाहियॆ ताकि हमारें जनप्रतिनिधियों को जगाया जा सकें।

सहभोज के बाद दितीय सत्र का शुभारम्भ कैबिनेट मन्त्री सुबोध उनियाल एवं डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला , पूर्व ब्लॉक प्रमुख जोत सिंह बिष्ट , NOPS (पुरानी पेंशन) के अध्यक्ष जीतमणि पेन्युली के साथ बाल आयोग की पूर्व अध्यक्ष उषा नेगी व गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना व जगमोहन सिंह नेगी ने दीप प्रज्वलित कर शहीदों को पुष्प चढ़ाकर की गई।

काबीना मन्त्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति और पहाड़ को बचाना है तो सबसे पहले स्वयं से शुरू करना होगा केवल तराई में भाषणों तक सीमित ना रहें। राज्य आंदोलनकारियों के मसलों पर भी सरकार गम्भीर हैं और प्रत्येक राज्य आंदोलनकारियों को 10% क्षैतिज आरक्षण मिलना चाहियॆ साथ ही छूटे हुये लोगो का चिन्हीकरण हेतु हम कमेटी को अधिकार सम्पन्न हेतु प्रयासरत हैं।

जोत सिंह बिष्ट ने मेरा गांव मेरी जनगणना के विषय में बताते हुए कहा कि जब हम अपनी गणना गांव में करेंगे तो ही पलायन और परिसीमन का सपना पूर्ण होगा और राज्य की अवधारणा बचेगी।

कार्यक्रम के अन्त में बीते एक माह में जितने भी राज्य आंदोलनकारी दिवंगत हुये उनके निमित श्रद्धांजलि स्वरूप मौन धारण किया।

अन्तिम सत्र के बाद संस्कृति टीम के विपिन सनवाल और शिवानी रावत द्वारा गढ़वाली व कुमाऊंनी गीतों की संगीतमयी शाम से समापन किया।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, केशव उनियाल , रामलाल खंडूड़ी , सतेन्द्र भण्डारी , प्रदीप कुकरेती , जयदीप सकलानी, पूरण सिंह लिंगवाल , पृथ्वी सिंह नेगी, भानु रावत, सुरेश नेगी,संजय पुंडीर, धर्मपाल सिंह रावत, ध्यानपाल बिष्ठ, उमादत्त जुगरान, ध्यान पाल बिष्ट , मनमोहन नेगी , ललित जोशी , सुलोचना भट्ट, पुष्पलाता , तारा पाण्डे , सिलमाना, द्वारिका बिष्ट, अरुणा , थपलियाल, विजयलक्ष्मी गुसांईं, मोहम्मद शाहिद, चन्द्र किरण राणा , नरेन्द्र राणा , वीर सिंह रावत , धर्मपाल रावत , रघुवीर सिंह तोमर,राजेश पांथरी,सुदेश सिंह,सुशील चमोली, मनोज नौटियाल गोल्डी , मोहन थापा, मनोज जायड़ा, अजय कंडारी आदि मौजूद रहें।

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