देहरादून
देश का पहला राज्य बनेगा उत्तराखंड रोडमैप तैयार, दिसंबर से पहले शुरू होगी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बनने जा रहा है,
जहां सेना से चार साल की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार से जोड़ने के लिए अलग से अग्निवीर रोजगार सेल (एआरसी) बनाया जाएगा।
राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सेवानिवृत्त कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि सेल का ढांचा तैयार किया जा रहा है।
जिसे ऐसा दिया जाएगा जिसमें अग्निवीरों को रिटायरमेंट के बाद नौकरी या व्यवसाय से जोड़ा जाए।
31 दिसंबर 2026 में रिटायर होकर लौटने वाले पहले बैच से पहले इसकी पूरी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी ताकि अग्निवीरों का ऑनलाइन पंजीकरण,
स्किल मैपिंग, प्रशिक्षण और सरकारी-निजी क्षेत्रों में रोजगार एक ही मंच से उपलब्ध कराया जा सके।दिसंबर में लौटेगा पहला बैच, उससे पहले तैयार होगा सेल
कर्नल अजय कोठियाल ने बताया कि अग्निपथ योजना के तहत प्रशिक्षित अग्निवीरों का पहला बैच 31 दिसंबर 2026 को चार साल की सेवा पूरी कर लौटेगा।
इसके बाद एक महीने की प्रक्रिया चलेगी और एक फरवरी से 25 प्रतिशत अग्निवीर नियमित सेना में शामिल हो जाएंगे।
शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड सरकार ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी है।
उनका कहना है कि पहला बैच लौटने से पहले रोजगार सेल पूरी तरह तैयार होगा और उसके माध्यम से अग्निवीरों को रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से बनेगा स्किल बैंक-
रोजगार सेल के तहत हर अग्निवीर का ऑनलाइन पंजीकरण होगा। चार साल की सैन्य सेवा के दौरान हासिल कौशल, अनुभव और प्रशिक्षण का डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जाएगा।
इसी स्किल मैपिंग के आधार पर तय होगा कि कौन-सा अग्निवीर किस क्षेत्र और किस प्रकार की नौकरी के लिए उपयुक्त है।जरूरत के मुताबिक मिलेगा अतिरिक्त प्रशिक्षण
यदि किसी अग्निवीर को किसी विशेष नौकरी के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण की जरूरत होगी तो रोजगार सेल उसकी व्यवस्था भी करेगा।
10 से 15 दिन के कैप्सूल कोर्स और स्किल अपग्रेडेशन कार्यक्रम चलाए जाएंगे जिससे अग्निवीर संबंधित विभाग या निजी क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें।
50 से ज्यादा क्षेत्रों में मिलेंगे रोजगार के अवसर….
अग्निवीरों को केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
डिजास्टर मैनेजमेंट, पर्यटन, होटल उद्योग, सुरक्षा सेवाएं, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, खेल,
मैन्युफैक्चरिंग समेत 50 से अधिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी विभागों और निजी कंपनियों से समन्वय किया जाएगा।
सरकारी नौकरियों में 10% आरक्षण का भी मिलेगा लाभ:-
राज्य सरकार पहले ही अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था कर चुकी है।
इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस की भर्तियों में भी उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
रोजगार सेल के जरिए अब निजी क्षेत्र में भी उनके लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे।
सीएम कार्यालय की निगरानी में चलेगा पूरा सिस्टम:-
कर्नल कोठियाल ने बताया कि अग्निवीर रोजगार सेल सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में संचालित होगा।
इससे विभिन्न विभागों, स्किल डेवलपमेंट एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच समन्वय बेहतर होगा और रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होगी।
फिलहाल सेल के संचालन, कार्यालय, ऑनलाइन पोर्टल और विभागीय समन्वय का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।क्या है अग्निपथ योजना
अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष आयु के युवाओं की थल सेना, नौसेना और वायुसेना में चार वर्ष के लिए भर्ती की जाती है।
सेवा अवधि पूरी होने के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में शामिल किया जाता है,
जबकि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीर सेवा से बाहर आते हैं।
उत्तराखंड सरकार अब इन्हीं अग्निवीरों को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अग्निवीर रोजगार सेल की व्यवस्था लागू कर रही है।
राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) अजय कोठियाल का कहना है कि,
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्निवीरों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समय रहते रोजगार सेल बनाने की पहल की है।
हमारा प्रयास है कि सेना से लौटने वाला हर अग्निवीर अपनी योग्यता के अनुसार सही रोजगार से जुड़े।
इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण, स्किल मैपिंग, प्रशिक्षण और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की पूरी व्यवस्था की जा रही है और सेल के का विस्तार शुरू हो गया है।
जो दिसंबर में रिटायर होकर आने वाले अग्निवीर के पहले बैच से पहले पूरा हो जाएगा और उसके बाद रिटायर हो चुके अग्निवीरों को रोजगार से जोड़ दिया जाएगा।
